परमाणु निरीक्षणों को लेकर ईरान पर दबाव बढ़ायेगा अमेरिका

परमाणु निरीक्षणों को लेकर ईरान पर दबाव बढ़ायेगा अमेरिका

वियना, 07 सितंबर । अमेरिका ईरान के खिलाफ महीनों तक सैन्य युद्ध और आर्थिक प्रतिबंधों के बाद अब उस पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा रहा है।अपने परमाणु संयंत्रों और यूरेनियम भंडारों तक अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को पहुंच न देने के कारण अमेरिका ईरान मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भेजने पर जोर दे रहा है।

वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की इस सप्ताह होने वाली बैठक में यह कदम उठाये जाने की संभावना है।जून 2025 में ईरानी परमाणु ठिकानों पर इजरायली हवाई हमलों की शुरुआत के बाद से पिछले 15 महीनों से ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की इस परमाणु निगरानी संस्था को अपने यूरेनियम भंडार की पूरी तरह से जांच करने से रोक रखा है।

अमेरिका समर्थित यह प्रस्ताव ईरान से ‘परमाणु सामग्री के गैर-सैन्य इस्तेमाल से भटकाव को रोकने’ के उद्देश्य से निरीक्षण की अनुमति देने की मांग करता है।आईएईए ने सोमवार को कहा कि वह ईरान की घोषित परमाणु सामग्री और संयंत्रों की स्थिति की पुष्टि करने में असमर्थ है। एजेंसी ने चेतावनी दी कि पहुंच और जानकारी के अभाव से परमाणु प्रसार को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गयी हैं।

वियना में ‘बोर्ड ऑफ गवर्नर्स’ को संबोधित करते हुए आईएईए के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा कि ईरान ने न तो अपनी घोषित परमाणु सामग्री व संयंत्रों की स्थिति स्थापित करने के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान की है और न ही सत्यापन कार्य के लिए निरीक्षकों को प्रवेश की अनुमति दी है।श्री ग्रॉसी ने कहा, “इसके परिणामस्वरूप, मैं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और आईएईए बोर्ड के प्रासंगिक प्रस्तावों के ईरान के क्रियान्वयन पर रिपोर्ट देने में भी सक्ष्रम नहीं हूं।” उन्होंने बताया कि जून 2025 के सैन्य हमलों से प्रभावित संयंत्रों में पहले से घोषित कम-संवर्धित यूरेनियम और 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम-235 के स्टॉक के संबंध में एजेंसी का एक वर्ष से अधिक समय से संपर्क टूट चुका है और उसकी निरंतर जानकारी उपलब्ध नहीं है।

श्री ग्रॉसी ने इस स्थिति को ‘परमाणु प्रसार से जुड़ी गंभीर चिंता’ करार देते हुए कहा कि इसे ‘अत्यंत तात्कालिकता के साथ’ हल किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने ईरान से आईएईए के साथ सहयोग करने और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत अपने दायित्वों के अनुसार निरीक्षकों को प्रभावी सुरक्षात्मक कार्य फिर से शुरू करने की अनुमति देने का आग्रह किया।श्री ग्रॉसी ने वार्ता की ओर लौटने का भी आह्वान किया और कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए कूटनीति ही एकमात्र आवश्यक माध्यम है। उन्होंने कहा, “ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान खोजने के उद्देश्य से कूटनीति और वार्ता की ओर लौटना अनिवार्य है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि आईएईए ऐसे प्रयासों का समर्थन करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

यह नया तनाव ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि में सामने आया है। ईरान के परमाणु ठिकानों तक पहुंच समाप्त होने के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय के पास देश के संवर्धित यूरेनियम के भंडार के स्थान और स्थिति के बारे में स्पष्टता कम हो गयी है।पिछली बार जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु मामले को संयुक्त राष्ट्र में भेजने का प्रयास किया था, तब इजरायल ने 24 घंटे के भीतर 13 जून को ईरानी परमाणु संयंत्रों पर हमले शुरू कर दिये थे, जिससे ’12-दिवसीय युद्ध’ छिड़ गया था।

वर्तमान संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब आईएईए ने पूर्व के हमलों में क्षतिग्रस्त हुए ठिकानों के पास फिर से गतिविधियां शुरू होने की रिपोर्ट दी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कहा है कि इस सैन्य अभियान का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। तभी से यह संघर्ष गतिरोध पर पहुंच गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों के पास मध्य-2025 के हमलों की तुलना में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में अब बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।श्री ट्रंप ने पिछले सप्ताह कहा था कि अमेरिका जमीन के नीचे गहराई में बने ईरान के परमाणु संयंत्रों पर और हमलों पर विचार कर रहा है।

चार सितंबर को पत्रकारों से बात करते हुए श्री ट्रंप ने ईरान के नतांज स्थित मुख्य यूरेनियम संवर्धन परिसर के ठीक दक्षिण में एक मजबूत पहाड़ी ठिकाने का जिक्र करते हुए कहा, “हम बहुत जल्द पिकैक्स पर हमला कर सकते हैं।”श्री ट्रंप ने कहा, “पिकैक्स में चल रही हर हलचल की हमें जानकारी है। यदि कुछ भी गलत होता है, तो हम उन पर हमला करेंगे।”

इसके अलावा अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने और जवाबदेही में सुधार करने का आग्रह किया है। अमेरिका का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था को केवल यह मापने के बजाय कि कितना काम किया गया है, इस बात पर अधिक ध्यान देना चाहिए कि उसके कार्यक्रमों का क्या प्रभाव पड़ा है।सोमवार को वियना में आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक को संबोधित करते हुए अमेरिकी राजदूत ग्रिफिथ ने 2024-25 द्विवार्षिक अवधि के दौरान एजेंसी के प्रदर्शन का स्वागत किया और उल्लेख किया कि इसने अपने छह प्रमुख कार्यक्रमों के तहत 95 प्रतिशत प्रदर्शन लक्ष्यों को हासिल कर लिया है।

अमेरिका ने कहा कि इन परिणामों को केवल अतीत के प्रदर्शन का रिकॉर्ड मानने के बजाय भविष्य के बजट नियोजन में ठोस बदलावों का आधार बनाया जाना चाहिए।अमेरिका ने आईएईए से अधिक स्पष्ट और मापने योग्य प्रदर्शन सूचक विकसित करने तथा यह आंकलन करने का आह्वान किया कि उसका खर्च सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को कैसे प्रभावित करता है।

अमेरिका ने 100 से अधिक व्यावहारिक व्यवस्थाओं और 24 नये समझौता पत्रों (एमओयू) सहित साझेदारी के विस्तार का भी स्वागत किया, लेकिन साथ ही इस बात पर बल दिया कि ऐसे समझौतों को आईएईए के कानूनी ढांचे के अनुरूप होना चाहिए।

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