
मॉस्को, 12 सितंबर । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप की ऊर्जा नीति की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि रूस पहले यूरोपीय देशों को करीब 150-180 डॉलर प्रति 1,000 घन मीटर की दर से गैस उपलब्ध कराता था लेकिन यूरोपीय नेता लगातार गैस की कीमतें एक्सचेंज आधारित व्यवस्था के अनुसार तय करने पर जोर देते रहे।श्री पुतिन ने कहा, “हमने उनसे कहा था ‘गैस कोई बाजार आधारित कमोडिटी नहीं है। कम से कम, पारंपरिक अर्थों में तो बिल्कुल नहीं। यह व्यवस्था काम नहीं करेगी। आपकी कीमतें केवल बढ़ेंगी।’ खैर, अब आपको वही मिल गया जो आपने मांगा था। अब कीमत 1,000 डॉलर या यूरो तक पहुंच गई है, और शायद इससे भी ज्यादा।”उन्होंने चेतावनी दी कि एक्सचेंज पर कारोबार करने वाले लोग भौतिक गैस भंडार के बजाय अल्पकालिक मुनाफे पर ध्यान देते हैं और कीमतें बढ़कर 1,500 डॉलर तक पहुंच सकती हैं।श्री पुतिन ने इसे यूरोप की आर्थिक नीति की एक और “विनाशकारी गलती” बताया। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय रूसी ऊर्जा से वैचारिक रूप से दूरी बनाने के यूरोप के फैसले का परिणाम खुद उसके लिए आर्थिक नुकसान के रूप में सामने आया है।रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि यूक्रेन में मौजूदा संकट पश्चिमी देशों के वर्षों के दबाव का परिणाम है, जो 2014 में सत्ता परिवर्तन के बाद यूक्रेन को नाटो में शामिल कराने के प्रयासों तक पहुंच गया।उन्होंने कहा, “और अंततः यही आज यूक्रेन में हो रही दुखद घटनाओं का मूल कारण बना। इसके लिए पश्चिम के वैश्विकतावादी कुलीन वर्ग जिम्मेदार हैं। वे लगातार इसका दोष हम पर मढ़ते रहते हैं।”
श्री पुतिन ने कहा कि रूस ने बार-बार चेतावनी दी थी कि नाटो का पूर्व की ओर विस्तार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को गठबंधन में शामिल करने का प्रयास तत्काल तेज हो गया था, जब तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को एक खूनी सत्ता परिवर्तन के दौरान हटा दिया गया था।