
प्रयागराज, 14 सितंबर । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि न्यायपालिका पर आम आदमी का विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और लोगों को समय से न्याय मिलने के साथ यह भरोसा भी होना चाहिए कि उनकी बात सुनी गयी है तथा उन्हें निष्पक्ष न्याय मिलेगा।इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए योगी ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध वर्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश की आजादी के आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत में लोकतंत्र के सभी स्तंभों को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। महात्मा गांधी, पंडित मोतीलाल नेहरू, पंडित मदन मोहन मालवीय, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे विधिवेत्ताओं ने देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि प्रयागराज की धरती ने भारत की संवैधानिक चेतना और विधिक विमर्श को हमेशा महत्वपूर्ण दिशा दी है। यहां से अनेक न्यायविद, अधिवक्ता और जननेता निकले, जिन्होंने न्याय व्यवस्था को समृद्ध किया। न्यायपालिका और बार-बेंच के बीच बेहतर संवाद, समन्वय और सहयोग न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है।मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ न्यायिक एवं पुलिस ढांचे के सामने भी बड़ी चुनौतियां थीं। उस समय पुलिस बल में करीब 45 प्रतिशत पद रिक्त थे। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को गति देने के साथ पुलिस कर्मियों की प्रशिक्षण क्षमता को तीन हजार से बढ़ाकर 60 हजार प्रतिवर्ष किया है। प्रदेश के 56 जिलों में पुलिस के लिए भवन और बैरक बनाये गये हैं।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के लिए भी बेहतर आधारभूत सुविधाएं आवश्यक हैं। पहले प्रदेश के 10 जिलों में अधीनस्थ न्यायालय किराये के भवनों में संचालित हो रहे थे। अब इन जिलों में इंटीग्रेटेड कोर्ट भवन बनाये जा रहे हैं। करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से न्यायिक भवनों का निर्माण किया गया है।योगी ने कहा कि सरकार ने पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर दोषसिद्धि दर बढ़ाने, समय से आरोपपत्र दाखिल करने और वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत में मजबूती से प्रस्तुत करने की व्यवस्था की है। अदालतों और जेलों को हाई स्पीड इंटरनेट से जोड़ा गया है तथा न्यायिक दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को भी तेज किया गया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अधिवक्ता कल्याण निधि कोष में मिलने वाली राशि को डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया गया है। अधिवक्ताओं की मृत्यु पर मिलने वाली सहायता की आयु सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष की गयी है। करीब एक दर्जन जिलों में अधिवक्ताओं के लिए चैंबर का निर्माण कराया जा रहा है। जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में राज्य के विधि अधिकारियों की फीस में 50 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तीन नये कानून लागू किये गये हैं। बदलते समय में कानून के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए अधिवक्ताओं को स्वयं को लगातार अपडेट करना होगा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी युवा अधिवक्ताओं की है। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से अपील की कि वे स्वयं को केवल मुकदमों के परिणाम तक सीमित न रखें और संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी के साथ जिम्मेदार नागरिक की भूमिका भी निभायें।
उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में मल्टीलेवल पार्किंग तथा चैंबरों में फर्नीचर और उपकरण के लिए सरकार की ओर से सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन की ओर से जो भी प्रस्ताव आयेगा, सरकार उस पर सहयोग करेगी।योगी ने कहा कि 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को पांच लाख रुपये तक का कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने समारोह में उपस्थित मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, वरिष्ठ न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, न्यायमूर्तियों, महाधिवक्ता अजय मिश्रा, अपर महाधिवक्ताओं, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय ‘बबुआ’, महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा और अन्य पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर योगी ने हिंदी दिवस, हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं देते हुए हिंदी को राजभाषा के रूप में और अधिक प्रतिष्ठित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया।