महिला आरक्षण से संबंधित नारी शक्ति वंदन विधेयक को संसद की मंजूरी

महिला आरक्षण से संबंधित नारी शक्ति वंदन विधेयक को संसद की मंजूरी

नयी दिल्ली 21 सितम्बर। राज्यसभा ने देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए लोकसभा तथा विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने वाले 128वें संविधान संशोधन विधेयक को गुरूवार को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। सदन में मौजूद सभी 214 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया।
   इसके साथ ही इस विधेयक पर संसद की मुहर लग गयी क्योंकि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। सदन ने अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को 33 प्रतिशत में अलग से आरक्षण देने और महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल प्रभाव से लागू करने के संंबंध में संशोधन प्रस्ताव पेश किये लेकिन सदन ने इन्हें ध्वनिमत से खारिज कर दिया।
   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इस विधेयक पर काफी सार्थक चर्चा हुई है और इसका एक-एक शब्द देश की आगे की यात्रा में काम आने वाला है। उन्होंने कहा कि इसका समर्थन करने वाले सभी सांसदों का वह आभार व्यक्त करते हैं। यह भावना देश के जन जन में नया आत्मविश्वास पैदा करेगी क्योंकि सभी दलों ने एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।   उन्होंने कहा कि सभी दलों की सकारात्मक सोच से नारी शक्ति को विशेष सम्मान मिला है। उन्होंने सदस्यों से विधेयक  को सर्वसम्मति से पारित करने का आग्रह किया।
   सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि बड़ी खुशी की बात है कि समूचे सदन ने सर्वसम्मति से इस विधेयक को पारित किया है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक घड़ी है।
   केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने विधेयक पर 72 सदस्यों द्वारा की गयी करीब दस घंटे की चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि विपक्षी सदस्यों को विधेयक को लेकर किसी तरह की आशंका नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस विधेयक को इसलिए पारित नहीं करा पाया क्योंकि उसके पास न तो नेतृत्व था, न ही नीयत थी और न ही नीति थी।   उन्होंने कहा कि विधेयक के प्रावधानों को लागू करने से पहले जनगणना के आंकड़े इसलिए जरूरी है क्योंकि यह देश के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं की विस्तार से जानकारी देते हैं और इसलिए अनुच्छेद पांच में यह प्रावधान किया गया है कि विधेयक लागू किये जाने से पहले जनगणना और परिसीमन कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत में महिलाओं को नीति निर्धारण के केन्द्र में पहुंचाने के लिए यह विधेयक लाया गया है।
   विधेयक में ओबीसी वर्ग को भी आरक्षण देने की कांग्रेस की मांग पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी भी ओबीसी वर्ग के हित में नहीं रही और अब इसका यह प्रेम राजनीतिक पैंतरे के समान है। विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यह विधेयक जुमला नहीं है। परिसीमन कराना इसके तहत कानूनी प्रक्रिया की जरूरत है। इसके लिए एक अर्द्ध न्यायिक संस्था का गठन किया जायेगा जिसमें उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश के अलावा राजनीतिक दलों के सदस्य भी होंगे।
  उन्होंने कहा कि परिसीमन के लिए वर्ष 2026 का समय पहले से ही निर्धारित है यह व्यवस्था हमें विरासत में मिली है। यह विधेयक जनगणना और परिसीमन के बाद निश्चित रूप से लागू हो जायेगा। ओबीसी वर्ग की महिलाओं को आरक्षण से बाहर रखने पर उन्होंने कहा कि संविधान में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए उस तरह से आरक्षण की बात नहीं की गयी है जैसे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए कही गयी है।
  कम्युनिस्ट सदस्यों संदोष कुमार पी, जॉन ब्रिटास और विनय विश्वम, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा, समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव , कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल, दीपेन्द्र हुड्डा, नासिर हुसैन , नीरज डांगी, अमी याजनिक, रंजीत रंजन, रजनी पाटिल , फुलो देवी नेताम, राजमणि पटेल, जेबी माथेर और एल हनुमंथैया तथा  शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को 33 प्रतिशत में अलग से आरक्षण देने और महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल प्रभाव से लागू करने के संंबंध में संशोधन प्रस्ताव पेश किये लेकिन सदन ने इन्हें ध्वनिमत से खारिज कर दिया। इससे पहले सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि हमारा इंडिया गठबंधन विधेयक का दिल से समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि विधेयक का अनुच्छेद 5 कहता है कि जब परिसीमन पूरा हो जायेगा तो ही विधेयक लागू होगा और परिसीमन भी जनगणना के बाद ही कराया जायेगा। इन दोनों शर्तों के बिना यह लागू नहीं होगा।    उन्होंने कहा कि इस विधेयक को दोनों शर्तों से जोड़ने की जरूरत नहीं है। आप नोटबंदी कर सकते हैं और बिना सोचे समझे किसान विधेयक ला सकते हैं तो आपको यह विधेयक लाने में दस वर्ष क्यों लगे। आपने इसकी कोशिश नहीं की। अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को आरक्षण कैसे मिलेगा उन्हें भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए लेकिन आपने उन्हें छोड़ दिया। आपने उन महिलाओं को क्यों छोड़ दिया। यह कानून लागू कब होगा। एक समय सीमा तो बतानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो यह एक जुमला होगा। केवल भावनात्मक भाषण देकर कुछ नहीं होगा बल्कि गलती को सुधारना होगा। शीतकालीन सत्र में इसकी कमियों को दूर करें।
   विधेयक पारित होने के बाद सभापति ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।

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