
नयी दिल्ली, 16 सितंबर। सरकार ने यूपीआई के माध्यम से 2,000 रुपये से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगाने के फैसले का बचाव करते हुए इस फैसले के पीछे विदेशी प्रभाव के आरोपों को खारिज कर दिया है।केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा, “कुछ दावों में कहा जा रहा है कि यह बदलाव विदेशी प्रभाव में आकर किया गया है। यह गलत है।” मंत्रालय ने कहा है कि यूपीआई को लेकर देश के नीतिगत फैसले पूरी स्वतंत्रता के साथ लिए जाते हैं। इनका स्पष्ट लक्ष्य स्वावलंबी, समावेशी और कम खर्चीला डिजिटल भुगतान पारितंत्र तैयार करना है।
इससे पहले रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए मंगलवार देर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि यह देश के डिजिटल भुगतान पारितंत्र में लंबे समय के लिए स्वावलंबन को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह देश भर में यूपीआई के विस्तार, इसमें नवाचार और उपभोक्ताओं तथा कारोबार की सेवा में सहायक होगा।केंद्रीय बैंक ने कहा कि पूरे पारितंत्र के साझेदारों के बीच एडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) के समुचित वितरण से प्रौद्योगिकी और अवसंरचना में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इससे यूपीआई का ग्राहक आधार और लेनदेन का मूल्य बढ़ेगा।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने यूपीआई के जरिये 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर तय किया है जो 15 अक्टूबर से लागू होगा। व्यक्तिगत यूपीआई खातों से मर्चेंट खातों में भुगतान पर 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होगा। शुल्क मर्चेंट से यानी पैसा जिसके खाते में गया है उससे लिया जाएगा। अधिकतम एमडीआर 300 रुपये होगा।अनिवार्य सेवाओं जैसे रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि क्षेत्र में बीज, खाद आदि के लिए पांच रुपये प्रति ट्रांजेक्शन का शुल्क तय किया गया है। पूंजी बाजार से संबंधित लेनदेन जैसे म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति और स्टॉक ब्रोकर और डीलरों के लिए एमडीआर की दर 0.02 प्रतिशत तय की गयी है। इसमें भी अधिकतम शुल्क 300 रुपये तय की गयी है।
आरबीआई ने कहा है कि वह यूपीआई को सुरक्षित निर्बाध, कम खर्चीला और सुलभ बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।