
सहारनपुर, 16 सितंबर। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। दोनों दलों में उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन चल रहा है और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बदले राजनीतिक हालात में नए और मजबूत चेहरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।राजनीतिक जानकार एवं महाराज सिंह कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर योगेश गुप्ता का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनाव में नए और जिताऊ चेहरों का चयन महत्वपूर्ण हो सकता है। भाजपा जहां सरकार के कामकाज और संगठन के आधार पर चुनावी तैयारी कर रही है, वहीं सपा भी उम्मीदवार चयन और सामाजिक समीकरणों को लेकर सक्रिय है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन के लिए विभिन्न स्तरों पर सर्वे कराया है।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा के 37 सीटें जीतने के बाद पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ा है। आगामी विधानसभा चुनाव में बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों के साथ सपा का पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) सामाजिक समीकरण भी उसकी रणनीति का हिस्सा है।कांग्रेस और सपा के बीच सीटों के बंटवारे का मुद्दा भी चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दोनों दलों के बीच सीटों का तालमेल पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न क्षेत्रों में उम्मीदवार चयन को प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी की संभावनाओं और सीटों को लेकर सक्रिय हैं।
समाजशास्त्री प्रोफेसर सुधीर पवार के अनुसार दलितों और अल्पसंख्यकों के बीच कांग्रेस के प्रति रुझान बढ़ने की चर्चा है, हालांकि इन वर्गों में सपा की भी मजबूत राजनीतिक पहुंच रही है। उनके मुताबिक बदली परिस्थितियों में कांग्रेस, सपा और भाजपा सभी दल नए चेहरों और सामाजिक समीकरणों के आधार पर उम्मीदवार चयन पर जोर दे रहे हैं।भाजपा की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में भी व्यापक स्तर पर फीडबैक जुटाने की खबरें सामने आई हैं। पार्टी ने बूथ से जिला स्तर तक सर्वे के जरिए मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन, सरकार की योजनाओं के प्रभाव और नए दावेदारों के बारे में जानकारी जुटाई है।
सपा भी उम्मीदवार चयन को लेकर सर्वे, सामाजिक समीकरण और जीत की संभावनाओं को आधार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी की ओर से संभावित उम्मीदवारों को लेकर विभिन्न स्तरों पर फीडबैक लिए जाने की खबरें हैं।अखिलेश यादव के दो सितंबर के सहारनपुर दौरे के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नेताओं के साथ उम्मीदवार चयन को लेकर चर्चा की गई थी। इनमें सांसद इकरा हसन, पूर्व सांसद फजर्लुरहमान कुरैशी और जाट समाज में सक्रिय नेता हरेंद्र मलिक शामिल थे। हरेंद्र मलिक के अनुसार सपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समाज को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान देगी।
दूसरी ओर, भाजपा के साथ राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का गठबंधन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरण में महत्वपूर्ण है। रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी, वरिष्ठ नेता केसी त्यागी और सांसद चंदन चौहान पार्टी के किसान और पिछड़ा वर्ग से जुड़े आधार को मजबूत करने में सक्रिय हैं।सपा प्रमुख अखिलेश यादव प्रत्येक विधानसभा सीट पर संभावित उम्मीदवारों के विकल्प तैयार कराने पर जोर दे रहे हैं। सांसद इकरा हसन के अनुसार उम्मीदवार चयन में जीत की संभावना को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता में वापसी और विपक्ष की चुनौती के बीच उम्मीदवारों का चयन, गठबंधन की स्थिति तथा स्थानीय सामाजिक समीकरण महत्वपूर्ण चुनावी कारक रहेंगे। भाजपा ने सितंबर से अपना जनसंपर्क अभियान भी तेज किया है, जबकि सपा पहले से उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक तैयारियों पर काम कर रही है।