आईआईटी कानपुर में वाधवानी इनोवेशन सेंटर शुरू, स्वास्थ्य क्षेत्र के अनुसंधान को बाजार तक पहुंचाने पर जोर

आईआईटी कानपुर में वाधवानी इनोवेशन सेंटर शुरू, स्वास्थ्य क्षेत्र के अनुसंधान को बाजार तक पहुंचाने पर जोर

कानपुर, 17 सितंबर। स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुसंधान को उत्पादों और व्यावहारिक समाधानों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए आईआईटी कानपुर में वाधवानी इनोवेशन सेंटर फॉर लाइफ साइंसेज एंड मेडिकल टेक्नोलॉजीज की स्थापना की गई है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) के रूप में कार्य करने वाले इस केंद्र को पांच वर्षों में पांच मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता मिलेगी।इस वित्तीय सहायता से लाइफ साइंसेज, बायोटेक्नोलॉजी, मेडिकल टेक्नोलॉजी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में संभावनाशील नवाचारों के विकास, परीक्षण और व्यावसायीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। सेंटर का शुभारंभ रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. उपेंद्र कुमार सिंह की उपस्थिति में हुआ।

सेंटर थेरेप्यूटिक्स, रीजनरेटिव मेडिसिन, ड्रग डिलीवरी, वैक्सीन, मेडिकल डिवाइस और डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में उच्च क्षमता वाले अनुसंधान को सहयोग देगा। इसके अलावा न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों, मानसिक स्वास्थ्य, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।आईआईटी कानपुर की अनुसंधान क्षमताओं का लाभ उठाते हुए केंद्र प्रयोगशाला में विकसित संभावनाशील विचारों को स्वास्थ्य सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों और समाधानों में बदलने में मदद करेगा। शोधकर्ताओं को तकनीकी वैलिडेशन, बौद्धिक संपदा (आईपी), नियामकीय प्रक्रियाओं, तकनीक हस्तांतरण और व्यावसायीकरण के लिए उद्योग जगत से जोड़ने में सहयोग दिया जाएगा।

इस अवसर पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि संस्थान में रीजनरेटिव मेडिसिन, मॉलिक्यूलर मेडिसिन, न्यूरोसाइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत बायोमेडिकल रिसर्च का मजबूत इकोसिस्टम है। WIN-CoE इस कार्य को आगे बढ़ाते हुए तकनीक विकास एवं हस्तांतरण, उद्यमिता और व्यावसायीकरण के माध्यम से संभावनाशील अनुसंधान को उत्पादों में बदलने में सहायक होगा।वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. शिरशेंदु मुखर्जी ने कहा कि भारत में उत्कृष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान की कमी नहीं है, लेकिन प्रयोगशाला में हुए अनुसंधान को बाजार तक पहुंचाने के लिए मजबूत व्यवस्था की आवश्यकता है। WIN के माध्यम से शोधकर्ताओं को विशेषज्ञता, उद्योग साझेदारी, पूंजी और व्यावसायीकरण से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

आईआईटी कानपुर के बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एवं WIN-CoE के प्रोफेसर इन-चार्ज प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि केंद्र के माध्यम से संभावनाशील विचारों को प्रयोगशाला की सीमाओं से आगे विकसित करने और नवाचारों को वास्तविक जरूरतों एवं उपयोगों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।इसी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं WIN-CoE के को-प्रोफेसर इन-चार्ज प्रो. संतोष मिश्रा ने कहा कि चिकित्सकीय जरूरतों, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीकों को एक साथ लाकर केंद्र अनुसंधान को बाजार के लिए तैयार बायोमेडिकल उत्पादों और चिकित्सा समाधानों में बदलने में मदद करेगा।

शुभारंभ के बाद ‘ट्रांसलेशनल रिसर्च एंड रेगुलेटरी पाथवेज: ब्रिजिंग इनोवेशन टू हेल्थकेयर इम्पैक्ट’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें नियामक एजेंसियों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य क्षेत्र, उद्योग और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला में प्रयोगशाला में विकसित नवाचारों को क्लिनिकल वैलिडेशन और नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया से आगे बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग तक पहुंचाने के विभिन्न चरणों पर चर्चा की गई।

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