प्रेमानंद महाराज के समर्थन में उतरे अनिरुद्ध आचार्य,बोले टीआरपी के लिए मीडिया बन रहा जज…

प्रेमानंद महाराज के समर्थन में उतरे अनिरुद्ध आचार्य,बोले टीआरपी के लिए मीडिया बन रहा जज…

मथुरा 03 अक्टूबर। सोशल मीडिया पर ‘पुकि बाबा’ के नाम से चर्चित कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य एक बार फिर अपने तीखे बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने पूज्य संत प्रेमानंद जी महाराज का बचाव करते हुए मीडिया और सोशल मीडिया पर टीआरपी बटोरने वालों पर जमकर अपना गुस्सा निकाला है। अपनी कथा के दौरान दिए गए उनके इस बयान का वीडियो इंटरनेट पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अनिरुद्ध आचार्य ने कहा कि आज के दौर में कुछ लोग और मीडिया केवल टीआरपी और व्यूज पाने के लिए कुछ भी बोल देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया, “लोग पूरा विषय जानते-समझते नहीं हैं और खुद ही जज बनकर फैसला सुनाने लगते हैं। किसी को भी आरोपी बनाकर गलत ठहरा दिया जाता है।”

प्रेमानंद जी महाराज के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अनिरुद्ध आचार्य ने कहा कि महाराज जी ने करोड़ों लोगों को भक्ति मार्ग से जोड़ा है। गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद वे श्रद्धालुओं के कल्याण के लिए उनसे मिलते हैं। उन्होंने कहा, “उनकी किडनी साथ नहीं देती और शरीर में सूजन बनी रहती है। वे चाहें तो एकांत में रह सकते हैं, लेकिन लोगों के सुख और दर्शन के लिए सबसे मिलते हैं। इसके बाद भी समाज और मीडिया उनके पीछे पड़ा हुआ है।”किसी श्रद्धालु की मौत के संदर्भ में संत पर उठाए जा रहे सवालों पर कथावाचक ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी की भी मृत्यु के लिए संत जिम्मेदार नहीं हो सकते। मौत अटल है और यह मृत्यु लोक है, जहाँ जो आया है उसे जाना ही होगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भगवान का नाम जपने का मतलब यह नहीं है कि कोई अमर हो गया है। इसलिए बिना पूरी बात समझे संतों को परेशान नहीं करना चाहिए।

पौराणिक प्रसंग का हवाला देते हुए अनिरुद्ध आचार्य ने चेतावनी दी कि संतों का अपमान किसी को भी भारी पड़ सकता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांब और महर्षि दुर्वासा का उदाहरण देते हुए कहा कि श्रीकृष्ण के समझाने के बाद भी जब सांब ने संत का अपमान किया, तो पूरे यदुवंश के सर्वनाश का श्राप मिल गया।उन्होंने कहा कि जब भगवान का वंश संतों का श्राप नहीं झेल पाया, तो आम इंसान क्या चीज़ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यह बात सच्चे भक्तों के लिए नहीं, बल्कि केवल उन लोगों के लिए कह रहे हैं जो व्यूज और गाली-गलौज के चक्कर में संतों का दिल दुखाते हैं।

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