
नयी दिल्ली, 04 अक्टूबर । दिल्ली पुलिस ने रविवार को बताया कि नयी दिल्ली इलाके में शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाये हैं और इन शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए अपराध शाखा को भेज दिया गया है।पुलिस उपायुक्त नेहा यादव ने बताया कि उस दिन इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू होने के बावजूद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और अन्य संगठनों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ प्रदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को आदेश के बारे में बताया गया था और निषेधाज्ञा के संबंध में उन्हें चेतावनी भी दी गयी थी। साथ ही, बीएनएसएस की धारा 163 का हवाला देते हुए उन्हें वहां से चले जाने के लिए कहा गया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के इनकार करने और आदेश का पालन नहीं करने पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को उन्हें हिरासत में लेना पड़ा।डीसीपी ने बताया कि शनिवार शाम करीब छह बजे तीन महिलाओं ने खुद को पत्रकार बताते हुए शिकायत दी। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए जाने के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और मारपीट की।इसके बाद उनकी शिकायत विधिवत दर्ज की गयी और उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। मामले को आगे विस्तृत जांच के लिए अपराध शाखा को भेज दिया गया है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी के पास इस संबंध में कोई प्रासंगिक वीडियो फुटेज है, तो वह सामने आकर उसे अपराध शाखा के साथ साझा कर सकता है। इससे जांच में मदद मिल सकती है।पुलिस ने बताया कि अपराध शाखा अब महिलाओं द्वारा लगाए गये आरोपों की जांच करेगी। इसके साथ ही मामले की जांच के तहत उनके और अन्य संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
इस बीच, इंडियन विमेंस प्रेस कोर (आईडब्ल्यूपीसी) ने एक बयान जारी कर गत तीन अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा महिला पत्रकारों के साथ किए गये ‘यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के कृत्यों’ की कड़ी निंदा की। आईडब्ल्यूपीसी ने कहा कि कम से कम एक महिला पत्रकार ने कैमरे के सामने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाये हैं और इस कथित कृत्य के लिए सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) स्तर के एक अधिकारी का नाम लिया है।आईडब्ल्यूपीसी ने कहा, “यह चौंकाने वाली बात है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने उक्त अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। यह मामला अभी लंबित है।” संगठन ने मांग की कि बिना किसी और देरी के प्राथमिकी दर्ज की जाए।