राज्यसभा चुनाव: आठों नए चेहरे मैदान में: हरदीप पुरी और बीएल वर्मा समेत सभी मौजूदा सदस्यों का टिकट कटा

राज्यसभा चुनाव: आठों नए चेहरे मैदान में: हरदीप पुरी और बीएल वर्मा समेत सभी मौजूदा सदस्यों का टिकट कटा

लखनऊ, 05 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को अपने आठ प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए। पार्टी की सूची ने कई स्तरों पर चौंकाया है। खास बात यह है कि राज्यसभा का कार्यकाल पूरा कर रहे भाजपा के सभी आठ सदस्यों को दोबारा प्रत्याशी नहीं बनाया गया है। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा भी शामिल हैं।भाजपा ने इस बार संगठन, सरकार, सामाजिक प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडे, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। इनमें तीन ओबीसी, दो अनुसूचित जाति और तीन सामान्य वर्ग से आने वाले नेता शामिल है।

श्रुति गंगवार का नाम खास तौर पर चर्चा में है। बरेली निवासी श्रुति गंगवार झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। उनका नाम उन संभावित दावेदारों में प्रमुखता से सामने नहीं आया था, जिनकी चर्चा राज्यसभा चुनाव को लेकर पिछले दिनों राजनीतिक हलकों में चल रही थी। प्रकाश पाल कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। राज्यसभा के लिए उनके चयन से संगठन में उनकी भूमिका का दायरा और बढ़ा है।प्रियंका सिंह रावत बाराबंकी से 16वीं लोकसभा की सदस्य रह चुकी हैं। वह भाजपा के प्रमुख महिला चेहरों में शामिल हैं और संगठन में प्रदेश तथा राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रही हैं। राधाकांत ओझा मूल रूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं और इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वह हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनके भाई शिवाकांत ओझा भाजपा के टिकट पर प्रतापगढ़ से विधायक रहे और प्रदेश सरकार में मंत्री भी बने।

धर्मपाल सिंह बरेली की आंवला विधानसभा सीट से विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री हैं। पार्टी संगठन में भी वह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। राम प्रताप सिंह चौहान आगरा के पूर्व विधायक और भाजपा के प्रदेश महामंत्री हैं। लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे चौहान ने जमीनी कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया और संगठन के विभिन्न दायित्वों से होते हुए प्रदेश नेतृत्व में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।गोपी कृष्ण पांडे भी लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं। उन्हें वरिष्ठ संगठनकर्ता के रूप में जाना जाता है और वह पार्टी के विभिन्न संगठनात्मक अभियानों में भूमिका निभाते रहे हैं। विद्यासागर सोनकर भाजपा के वरिष्ठ दलित चेहरों में शामिल हैं। जौनपुर के रहने वाले सोनकर लोकसभा सांसद, विधान परिषद सदस्य और प्रदेश महामंत्री समेत संगठन और सदन में कई जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। निर्वाचन आयोग ने सितंबर में चुनाव कार्यक्रम घोषित किया था। इन सीटों में भाजपा के पास वर्तमान में आठ सीटें हैं, जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास एक-एक सीट थी।मौजूदा विधानसभा के आंकड़ों के आधार पर भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए आठ सीटों का दावा मजबूत है, जबकि समाजवादी पार्टी दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति में है। हालांकि तीसरे उम्मीदवार के सवाल और संभावित क्रॉस वोटिंग ने मुकाबले को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है।

समाजवादी पार्टी ने पहले ही प्रो. राम गोपाल यादव और उद्योग जगत से जुड़े धनराज पारिमल नाथवाणी को उम्मीदवार बनाया है। तीसरी सीट के लिए उसके रुख को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा रही है। राज्यसभा चुनाव के परिणाम 16 अक्टूबर को मतदान के बाद उसी दिन घोषित किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह चुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक संख्या बल की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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