
वाराणसी, 08 अक्टूबर । बदलते दौर में जहां लोग अपनों के लिए भी समय नहीं निकाल पाते, वहीं काशी के समाजसेवी अमन कबीर ने उन लोगों के लिए अपना फर्ज निभाया, जिनका इस दुनिया में कोई अपना नहीं था। अमन कबीर ने बुधवार को पंचगंगा घाट पर 52 ऐसे ज्ञात-अज्ञात, लावारिस, अनाथ और दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों का तर्पण और पिंडदान किया, जिनका उन्होंने अंतिम संस्कार कराया था।अमन कबीर ने बताया कि इन 52 लोगों का अंतिम संस्कार उन्होंने स्वयं कराया था। मुखाग्नि अमन स्वयं देते हैं। उनकी मोक्ष-मुक्ति की कामना से पितृ पक्ष में विधि-विधान के साथ तर्पण और पिंडदान किया गया। उन्होंने कहा कि अमन कबीर सेवा न्यास ऐसे लोगों के अंतिम सफर का साथी बनता है और जिन कर्मकांडों को सामान्य तौर पर परिजनों को करना चाहिये, उन्हें न्यास की ओर से पूरा किया जाता है।
न्यास की ओर से जिन ज्ञात-अज्ञात, लावारिस, अनाथ और दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों का अंतिम संस्कार कराया गया था, उनके लिए यह धार्मिक कर्मकांड संपन्न कराया गया। श्राद्ध कर्म पंडित वेद आशीष महाराज ने हिंदू परंपरा के अनुसार विधि-विधान से कराया।अमन कबीर ने बताया कि सड़क दुर्घटना में मौत हो या अस्पताल में इलाज के दौरान किसी लावारिस मरीज की मृत्यु, सूचना मिलने पर वह अपने सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचते हैं। सबसे पहले मृतक की पहचान और उसके परिजनों की तलाश का प्रयास किया जाता है। पहचान नहीं होने अथवा परिजनों के मौजूद होने के बावजूद शव को छोड़ दिए जाने की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अंतिम संस्कार कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद न्यास की टीम ऐसे शवों का काशी के मणिकर्णिका घाट या हरिश्चंद्र घाट पर हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करती है।