जीएसटी कानून में गिरफ्तारी का प्रावधान समाप्त करने का फैसला, जीएसटी 2.0 में प्रक्रिया आसान बनाने पर बल

जीएसटी कानून में गिरफ्तारी का प्रावधान समाप्त करने का फैसला, जीएसटी 2.0 में प्रक्रिया आसान बनाने पर बल

नयी दिल्ली, 8 अक्टूबर । माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने इस अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के अंतर्गत गिरफ्तारी का प्रावधान हटाने और आपराधिक मुकदमा चलाने संबंधी प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने का फैसला किया है।इसके साथ ही उसने जीएसटी प्रक्रियाओं और नियमों के अनुपालन में व्यापक सुधार करने की सिफारिशें की हैं।

केंद्रीय वित्त एवं कार्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में ये फैसले लिये गये। यह बैठक गत वर्ष सितंबर की बैठक के बाद पहली बार आयोजित की गयी थी। पिछली बैठक जीएसटी की दरों और कर ढांचे में व्यापक सुधार के लिए याद की जाती है जबकि इस बार -प्रक्रिया और अनुपालनों में सुधार पर बल दिया गया। उन्होंने कहा कि परिषद की 57वीं बैठक की सिफारिशें अगले साल पहली अप्रैल से लागू की जाएंगी। आज के एजेंडा में आपूर्ति श्रृंखला किसी स्तर पर किसी इकाई द्वारा कर दायित्व में चूक करने पर जीएसटी इनपुट कर क्रेडिट में व्यवधान को दूर करने तथा केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के तहत बहुराष्ट्रीय इकाइयों के लिए सिंगल विंडा सुविधा शुरू करने के मुद्दे को अधिकारियों की समित को दिया गया है। जिसकी सिफारिश तीन महीने में आ जाएगी।वित्त मंत्री सीतारमण ने फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि जीएसटी की दरों की समीक्षा के लिए अब हर वर्ष जीएसटी परिषद की अलग बैठक होगी। उन्होंने कहा कि अब जीएसटी के तहत गिरफ्तारी का अधिकार समाप्त कर दिया गया है। कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए न्यूनतम सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दी गई है। साथ ही न्यूनतम सजा का प्रावधान भी समाप्त कर दिया गया है। देरी से रिटर्न फाइल करने के लिए मूल कर राशि की वसूली, ब्याज और जुर्माने से ज्यादा कोई कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि अलग-अलग राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) अधिकार क्षेत्र के दायरे में आने के कारण कई करदाताओं को अभी अलग-अलग रिटर्न भरने होते हैं। सीजीएसटी के तहत 69.5 लाख करदाताओं में से दो लाख इस श्रेणी में हैं। उनके लिए एकीकृत विंडो बनाने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। यह अगले वित्त वर्ष से लागू होगा।उन्होंने कहा कि रिफंड क्लेम के एक्नोलेजमेंट में लगने वाले समय को 15 दिन से घटाकर अब 10 दिन कर दिया गया है। पंजीकरण की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए लगने वाले दस्तावेजों के बारे में निश्चितता रहेगी। प्रणाली के जरिये ही इकाइयों को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे और मदद की जाएगी। छोटे आपूर्तिकर्ताओं के लिए ई-कॉमर्स के जरिये आपूर्ति करने के लिए पंजीकरण सरल किया जाएगा। करदाता पंजीकरण के समय दिए गए विवरण में स्वयं संशोधन कर सकेंगे और पंजीकरण रद्द कराने का आवेदन स्वतः स्वीकार माना जाएगा।

आज की बैठक में जीएसटी के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाने की सिफारिश करने के साथ ही अभियोजन के लिए विवादित कर राशि की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की गयी है। सामान्य जुर्माने को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और रिफंड के लिए पात्रता का दायरा बढ़ाने की सिफारिश की गयी है।जीएसटी परिषद ने पंजीकरण और अनुपालन प्रक्रियाओं को और सरल बनाने तथा कार्यशील पूंजी में सुधार के लिए रिफंड की प्रक्रिया तेज करने की सिफारिश की है। जीएसटी नोटिस और कार्यवाही के लिए समान मानक लागू करने तथा राज्यों के बीच माल की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए उपाय करने की भी सिफारिशें की गयी हैं।

परिषद ने खुफिया जानकारी के आधार पर और अधिकृत तरीके से माल की जांच/रोकथाम की सिफारिश की है तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर छोटे विक्रेताओं के लिए जीएसटी पंजीकरण को सरल बनाने की व्यवस्था बनाने का निर्णय किया गया है। बैठक में सेवाओं के निर्यात को सुविधाजनक बनाने के लिए उपाय करने तथा पांच करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले छोटे, उपभोक्ता-केंद्रित व्यवसायों के लिए वैकल्पिक योजना को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी देने का निर्णय किया गया।जीएसटी कानूनों के तहत गिरफ्तारी के प्रावधान को हटाने और अभियोजन से संबंधित प्रावधानों के युक्तीकरण किये जाने के संबंध में समिति ने सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 69 को हटा कर गिरफ्तारी की शक्तियों को पूरी तरह समाप्त करने की सिफारिश की है। साथ ही कर व्यवस्था को और मजबूत करने तथा धोखाधड़ी एवं कर चोरी के विरुद्ध प्रभावी रोक बनाए रखने के उद्देश्य से परिषद ने अभियोजन की मौद्रिक सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किये जाने की सिफारिश की है।

इस तरह सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132(1) के खंड (आई) को हटाने और खंड (ई) में कर की चोरी करता है तथा खंड (एच) में दिए गए शब्दों “या संबंधित किसी भी अन्य तरीके से ” को हटाये जाने का फैसला किया गया है।आज के निर्णय के बाद धारा 132(1) के खंड (सी) में संशोधन करने ताकि केवल इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने के लिए की गयी ऐसी धोखाधड़ी को ही अपराध की श्रेणी में शामिल किया जा सके, जिसमें वस्तुओं या सेवाओं की वास्तविक प्राप्ति न हुई हो अथवा कोई चालान/बिल न हो।

बैठक में सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132 के तहत विभिन्न अपराधों के लिए निर्धारित दंड की राशि को युक्तिसंगत बनाने की भी सिफारिश की गयी है।ई-वे बिल से संबंधित प्रावधानों काे युक्तिसंगत बनाने के लिए परिषद ने माल ले जाने वाले वाहन को केवल विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर और संयुक्त आयुक्त या उससे ऊपर के अधिकारी की अनुमति के आधार पर ही रोके जाने का प्रावधान करने की सिफारिश की है।

इन सिफारिशों के तहत ट्रांजिट राज्यों में वाहन को नहीं रोका जाएगा और माल की जांच तथा उसे रोकने या जब्त करने की आगे की कार्रवाई तभी की जा सकेगी, जब माल का आपूर्तिकर्ता या प्राप्तकर्ता उस राज्य में स्थित या पंजीकृत हो, जहां वाहन को रोका गया है।यदि ई-वे बिल नहीं बनाया गया है, अथवा वाहन में माल के उत्पत्ति स्थान या गंतव्य को दर्शाने वाला कोई दस्तावेज नहीं है, तो अधिकार क्षेत्र की परवाह किए बिना माल की जांच, उसे रोकने या जब्त करने की कार्रवाई की जा सकेगी। सीजीएसटी अधिनियम की धारा 130 के तहत माल/वाहन की जब्ती का प्रावधान ट्रांजिट में मौजूद माल या वाहनों पर लागू नहीं होगा।

परिषद ने सीजीएसटी नियम, 2017 के नियम 86ए में संशोधन की सिफारिश की है। इसके तहत ऐसी व्यवस्था की जाएगी जिससे करदाता अपने इलेक्ट्रानिक क्रेडिट लेजर में किसी राशि को ब्लॉक किए जाने के विरुद्ध आपत्ति दर्ज कर सके; और संबंधित अधिकारी द्वारा आपत्ति पर निर्णय लेने से पहले व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्राप्त कर सके।छोटे करदाताओं को विलंब शुल्क में राहत जीएसटी परिषद ने सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 39(1) के तहत रिटर्न देर से दाखिल करने पर लगने वाले विलंब शुल्क को माफ करने की सिफारिश की है। यह सुविधा उन करदाताओं के लिए होगी जिनका पिछले वित्तीय वर्ष में वार्षिक कारोबार 5 करोड़ रुपये तक था, बशर्ते संबंधित विलंबित रिटर्न जिस महीने में दाखिल किया जाना था, उसी महीने के अंत तक दाखिल कर दिया जाए।

जीएसटी परिषद ने विभिन्न मुद्दों पर परिपत्र जारी करने की सिफारिश की है, ताकि स्पष्टता लाई जा सके और फील्ड अधिकारियों द्वारा अलग-अलग व्याख्या किए जाने के कारण उत्पन्न असमंजस को दूर किया जा सके।सरकार के अनुसार पिछले साल सितंबर में जीएसटी की दरों को तर्क संगत बनाये जाने के बाद कर योग्य आपूर्ति में 25.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह 40.19 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 50.58 लाख करोड़ रुपये प्रति माह हो गई है। वहीं, उपभोक्ताओं को रिपोर्ट की गई आपूर्ति में 26.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह बढ़कर 7.58 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

इसी दौरान, घरेलू आपूर्ति पर प्रभावी कर दर 14.55 प्रतिशत से घटकर 13.13 प्रतिशत हो गई है।

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