
वाराणसी, 11 अक्टूबर । भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और सामाजिक मूल्यों के साथ नई पीढ़ी के संबंधों पर राष्ट्रीय विमर्श के लिए काशी में तीन से पांच नवंबर तक छठी संस्कृति संसद का आयोजन किया जाएगा। रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में संतों, विद्वानों, वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, युवाओं और कलाकारों की भागीदारी होगी। आयोजकों के अनुसार, इसमें देशभर से लगभग तीन हजार संतों के शामिल होने की उम्मीद है।इस संबंध में आयोजकों की ओर से ब्रह्म निवास छोटी गैबी में रविवार को जानकारी दी गई। जिनमें अखिल भारतीय संत समिति एवं गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, जगद्गुरु बालक देवाचार्य, श्री काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. राम नारायण द्विवेदी, गंगा महासभा के संगठन महामंत्री गोविंद शर्मा, आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश आचार्य, युवा विमर्श एवं जेन जी कॉन्क्लेव के प्रभारी आदेश भट्ट तथा कॉन्क्लेव के संयोजक नागेंद्र सिंह उपस्थित रहे।
गंगा महासभा की ओर से अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में आयोजित संस्कृति संसद में भारतीय परंपराओं, सांस्कृतिक-सामाजिक मूल्यों और समकालीन चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य संस्कृति संसद के साथ जेन जी कॉन्क्लेव, संस्कृति उत्सव, चित्रकला एवं फोटोग्राफी प्रदर्शनियों तथा रंगोली और बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा।आयोजकों के मुताबिक, मुख्य संस्कृति संसद का आयोजन प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक होगा। इसमें संत, विद्वान, वैज्ञानिक और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ निर्धारित विषयों पर अपने विचार रखेंगे। इसके समानांतर आयोजित जेन जी कॉन्क्लेव में युवा वक्तव्य, तथ्यों एवं आंकड़ों पर आधारित प्रस्तुतियों, पैनल चर्चाओं और प्रश्नोत्तर के माध्यम से समकालीन विषयों पर अपनी बात रखेंगे। कॉन्क्लेव की प्रस्तावित रूपरेखा में 90 प्रतिशत युवा वक्ताओं और 10 प्रतिशत विशेषज्ञों की भागीदारी निर्धारित की गई है।कार्यक्रम के तहत शाम पांच बजे से रात नौ बजे तक संस्कृति उत्सव आयोजित किया जाएगा। इसमें राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और संस्कार पर आधारित प्रस्तुतियां दी जाएंगी। युवा कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
इसके अतिरिक्त ‘राम, कृष्ण और शिव की पावन भूमि उत्तर प्रदेश : धरोहर, संरक्षण एवं संवर्धन’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय चित्रकला और फोटोग्राफी प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी। ये प्रदर्शनियां शिंजो आबे कला दीर्घा में लगाई जाएंगी। रंगोली और बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं के माध्यम से विभिन्न आयु वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित करने की भी योजना है।संस्कृति संसद के आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान-विमर्श और नई पीढ़ी के विचारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है। जहां संतों और विद्वानों की भागीदारी भारतीय परंपराओं एवं ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों पर विमर्श का अवसर देगी, वहीं जेन जी कॉन्क्लेव में युवा समकालीन सामाजिक और सांस्कृतिक प्रश्नों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
आयोजकों का कहना है कि संस्कृति संसद के माध्यम से संस्कृति के आध्यात्मिक, बौद्धिक, सामाजिक और कलात्मक आयामों को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। तीन दिवसीय आयोजन में विचार-विमर्श के साथ युवा सहभागिता और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी प्रमुखता दी जाएगी।