एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया राजनाथ और सेना प्रमुख ने

एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया राजनाथ और सेना प्रमुख ने

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने जापान में हुए एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले सेनाओं के खिलाड़ियों से सोमवार को यहां अलग- अलग कार्यक्रमों में मुलाकात की और उन्हें सम्मानित किया।श्री सिंह ने खिलाड़ियों से लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 में इससे भी बेहतर प्रदर्शन करने का आह्वान किया जबकि जनरल सेठ ने कहा कि सेना ओलंपिक 2028 के लिए खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।

रक्षा मंत्री ने कहा कि पदक जीतने के पीछे खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत, अनुशासन, टीम भावना और लगातार अभ्यास की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि पदक तक पहुंचने के लिए खिलाड़ियों को सुबह जल्दी उठकर अभ्यास करने, जिम में मेहनत करने, चोट से उबरने और खेल की तैयारी के साथ सैन्य इकाई की जिम्मेदारियां निभाने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने पदक नहीं जीत पाने वाले खिलाड़ियों से भी निराश न होने को कहा। उनके मुताबिक, हार तब होती है जब कोई प्रयास करना छोड़ देता है। हर खिलाड़ी ने किसी न किसी रूप में देश और रक्षा बलों का सम्मान बढ़ाया है।श्री सिंह ने खिलाड़ियों को तैयार करने में मिशन ओलंपिक विंग की भूमिका की सराहना की। यह विंग प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने, उन्हें वैज्ञानिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाएं देने तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने का काम करता है। उन्होंने कहा कि सरकार खेल ढांचे, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर देने पर ध्यान दे रही है। उन्होंने प्रशिक्षकों और सहयोगी कर्मचारियों से खिलाड़ियों को लगातार मार्गदर्शन देने, लक्ष्य ऊंचे रखने और ओलंपिक 2028 के लिए व्यवस्थित तैयारी करने का आग्रह किया।

इससे पहले सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी खिलाड़ियों से मुलाकात की और उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सेना लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए खिलाड़ियों की तैयारी मजबूत करेगी। इसके लिए खिलाड़ियों की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल, पोषण और प्रदर्शन में सुधार पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि सेना के खिलाड़ी अपने अनुशासन, मेहनत और बेहतर प्रदर्शन से देश का नाम रोशन करते रहेंगे।उन्होंने कम उम्र में खेल प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें लगातार बेहतर प्रशिक्षण देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेना की बालक और बालिका खेल कंपनियां, उच्च प्रदर्शन केंद्र और मिशन ओलंपिक विंग युवा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय खिलाड़ी बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस व्यवस्था में विशेषज्ञ प्रशिक्षण, चोट से बचाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव भी शामिल है।

एशियाई खेलों में तीनों सेनाओं के 92 खिलाड़ियों ने 19 खेलों में हिस्सा लिया। उन्होंने छह स्वर्ण, 11 रजत और 10 कांस्य सहित कुल 27 पदक जीते। यह भारत के कुल 85 पदकों का करीब 32 फीसदी और देश के 21 स्वर्ण पदकों में से छह का योगदान है। अकेले सेना के खिलाड़ियों ने छह स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य सहित कुल 20 पदक जीते। भारत ने प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल किया।नायब सूबेदार नीरू ढांडा ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। वह एशियाई खेलों में महिला ट्रैप शूटिंग में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने एथलेटिक्स में तीन व्यक्तिगत पदक जीते, जबकि हवलदार सावन बरवाल ने मैराथन में रजत जीतकर इस स्पर्धा में भारत का 44 साल का इंतजार खत्म किया। हवलदार अंकुश ने भी स्वर्ण पदक जीता।

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