
नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर। अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने यूपीआई भुगतान पर दिवाली तक शुल्क टालने के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे “समयानुकूल और व्यावहारिक” बताया है।
कैट के राष्ट्रीय महासचिव और दिल्ली की चांदनी चौक सीट से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने मंगलवार को कहा कि इस निर्णय से व्यापारियों के हितों की रक्षा होगी और त्योहारों के दौरान डिजिटल भुगतान के प्रति विश्वास मजबूत होगा।उल्लेखनीय है कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने आज घोषणा की कि व्यापारियों के लिए दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 15 अक्टूबर से प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) दिवाली के बाद लागू किया जाएगा।कैट ने कहा कि त्योहारी एवं वैवाहिक सीजन के दौरान यह निर्णय समयानुकूल और व्यावहारिक है। इस अवधि में देशभर के लाखों व्यापारी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) अपने कारोबार की बड़ी उम्मीदें रखते हैं। ऐसे समय में अतिरिक्त लेनदेन शुल्क से सीमित लाभ पर काम करने वाले व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ सकता था और डिजिटल भुगतान को अपनाने की गति भी प्रभावित हो सकती थी।गौरतलब है कि एनपीसीआई ने गत 15 सितंबर को घोषणा की थी कि यूपीआई के जरिये 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजेक्शन और 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं लगेगा। व्यक्तिगत यूपीआई खातों से मर्चेंट खातों में भुगतान पर एमडीआर लगाया जाना है। एक ट्रांजेक्शन पर अधिकतम एमडीआर 300 रुपये होगा।
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि क्षेत्र में बीज, खाद आदि के लिए पांच रुपये प्रति ट्रांजेक्शन का सपाट शुल्क तय किया गया है। पूंजी बाजार से संबंधित लेनदेन जैसे म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति और स्टॉक ब्रोकर तथा डीलरों के लिए एमडीआर की दर 0.02 प्रतिशत तय की गई है। इसमें भी अधिकतम शुल्क सीमा 300 रुपये होगी।सरकार यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि व्यक्तिगत से व्यक्तिगत यूपीआई खातों में लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। हर महीने यूपीआई से एक लाख रुपये तक का लेनदेन करने वाले छोटे व्यापारियों को भी एमडीआर के दायरे से बाहर रखा गया है।