
लखनऊ, 14 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण का विमोचन किया।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अभावों को संघर्ष का मार्ग बनाकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाले रामनाथ कोविन्द की जीवन यात्रा युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि परौंख गांव के एक गरीब परिवार में जन्मे कोविन्द ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा हासिल की और अधिवक्ता के रूप में वंचितों की आवाज बने। इसके बाद सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ते हुए राज्यसभा सदस्य, बिहार के राज्यपाल और देश के राष्ट्रपति बने।
उन्होंने कहा, “घर कच्चे थे, लेकिन इरादे पक्के थे।” उनकी यात्रा बताती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प और परिश्रम से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।योगी ने कहा कि व्यक्ति जीवन में कितनी भी ऊंचाई हासिल कर ले, उसे अपनी जन्मभूमि, गांव और पुराने संबंधों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने युवाओं से महापुरुषों की जीवनियां और आत्मकथाएं पढ़ने की अपील करते हुए कहा कि पुस्तकें ज्ञान बढ़ाने के साथ जीवन को दिशा देती हैं।
मुख्यमंत्री ने स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि लोग प्रतिदिन पांच से सात घंटे तक इन पर खर्च कर रहे हैं। युवाओं को रील और लाइक के पीछे समय गंवाने के बजाय अध्ययन और व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देना चाहिए।उन्होंने बताया कि प्रदेश के 57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय के लिए अलग कक्ष निर्धारित किया गया है। सरकार गांवों में बच्चों को अध्ययन की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ डिजिटल पुस्तकालयों के विकास पर भी काम कर रही है।
कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की पत्नी सविता कोविन्द, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, असीम अरुण तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।