पाकिस्तान की संसद ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल, गवर्नर शासन को मंजूरी दी

पाकिस्तान की संसद ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल, गवर्नर शासन को मंजूरी दी

पेशावर, 15 अक्टूबर। पाकिस्तान की संसद के संयुक्त सत्र ने गुरुवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल लागू करने और गवर्नर शासन लगाने के संघीय सरकार के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी।इस फैसले के खिलाफ प्रांत में सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने जोरदार विरोध किया।

पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की ओर से प्रकाशित एक खबर के अनुसार संसद का संयुक्त सत्र दोनों प्रस्तावों पर विचार करने के लिए बुलाया गया था। केंद्र सरकार ने 11 अक्टूबर को ये प्रस्ताव पेश किए थे। उसने आतंकवाद से निपटने के प्रयासों में प्रांतीय सरकार के कथित तौर पर जानबूझकर सहयोग नहीं करने को इसका आधार बताया।यह कदम केंद्र और पीटीआई के बीच कई सप्ताह से जारी राजनीतिक तनाव के बीच उठाया गया है। पीटीआई ने अपने संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर इस्लामाबाद तक लंबा मार्च निकालने की घोषणा की थी।

विपक्षी सांसद सदन में गुरुवार को ‘आपातकाल नामंजूर’ लिखी तख्तियां लेकर पहुंचे और प्रस्तावों का विरोध किया। संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने दोनों प्रस्ताव पेश करने से पहले नियमों में कुछ प्रावधानों को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे 214 मतों के मुकाबले 56 मतों से मंजूरी मिली।इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत आपातकाल और अनुच्छेद 234 के तहत गवर्नर शासन लागू करने संबंधी प्रस्ताव पेश किए गए। कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने बहस की शुरुआत की। कई घंटे की चर्चा के बाद नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अयाज सादिक ने दोनों प्रस्तावों पर मतदान कराया, जिसमें इन्हें मंजूरी मिल गई।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सत्र के एक हिस्से में भाग लिया और सीनेट तथा नेशनल असेंबली के विपक्षी नेताओं से हाथ मिलाते दिखाई दिए। कार्यवाही की शुरुआत में पेशावर में एक मकान की छत गिरने से मारे गए लोगों, जिनमें अधिकतर बच्चे थे, के लिए प्रार्थना भी की गई।इससे एक दिन पहले संसद के दोनों सदनों के अलग-अलग सत्रों में खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लगाने के समर्थन में प्रस्ताव पारित किए गए थे।

संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत राष्ट्रपति द्वारा अपनी पहल पर आपातकाल घोषित किए जाने पर उसे 10 दिनों के भीतर संसद के दोनों सदनों की मंजूरी के लिए प्रस्तुत करना आवश्यक है। वहीं, अनुच्छेद 234 के तहत गवर्नर शासन की घोषणा संयुक्त सत्र के समक्ष रखी जानी चाहिए। इसकी अवधि दो महीने बाद समाप्त हो जाती है, जब तक कि संसद इसे जारी रखने की मंजूरी न दे। गवर्नर शासन अधिकतम छह महीने तक लागू रह सकता है।

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