
लखनऊ, 16 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी (सपा) की हालत केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही खराब नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में पार्टी कमजोर हो रही है।श्री राजभर ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा का सफाया तय है और अखिलेश यादव अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देखकर हताश हैं। अखिलेश यादव ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में गन्ना किसानों की समस्याओं का मुद्दा उठाया था और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा की मजबूती का दावा किया था। इस पर पलटवार करते हुए राजभर ने सपा सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव किसानों के मुद्दे पर जनता को गुमराह कर रहे हैं और उनके शासनकाल में गन्ना किसानों को भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था। राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘झूठ की दुकान’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान गन्ना किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिलता था और किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था।राजभर ने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान किया गया है और भुगतान व्यवस्था में सुधार हुआ है। किसानों के हितों की बात करने से पहले अखिलेश यादव को अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए। सपा की चुनावी तैयारियों पर टिप्पणी करते हुए राजभर ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के मजबूत होने का दावा वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल जैसे दल सपा के राजनीतिक प्रभाव को चुनौती दे रहे हैं।
उन्होने कहा, “पूरब में ओम प्रकाश राजभर, संजय निषाद और अनुप्रिया पटेल साइकिल की हवा निकाल रहे हैं।” उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी सपा को आगामी चुनाव में उम्मीद से ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। अखिलेश यादव के दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं के सपा से जुड़ने के दावे पर राजभर ने पार्टी के पुराने कार्यकाल का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान पदोन्नति में आरक्षण समाप्त किया गया और दलितों के साथ अन्याय हुआ।उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर बनाए गए जिलों और पार्कों के नाम बदलने का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि दलित समाज इन घटनाओं को कैसे भूल सकता है। राजभर ने गेस्ट हाउस कांड का भी जिक्र किया और समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सवाल किया कि जिन घटनाओं को लेकर दलित समुदाय में नाराजगी रही है, उनके बावजूद दलित मतदाता सपा के साथ क्यों जाएंगे।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजभर ने अखिलेश यादव के बयानों पर भी सवाल उठाए।उन्होंने आरोप लगाया कि सपा को एसआईआर से परेशानी इसलिए हो रही है, क्योंकि इससे फर्जी मतदाताओं के नाम हटेंगे। राजभर ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था में सहयोग करना चाहिए।
राजभर ने दावा किया कि अखिलेश यादव को 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी हार का अंदेशा है, इसलिए वह लगातार भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साध रहे हैं।