
लखनऊ, 18 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग ने एक मतदाता के नाम पर कई मतदाता पहचान पत्र जारी होने से जुड़े विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि संबंधित मतदाता ने दो नहीं बल्कि चार आवेदन जमा किए थे। आयोग ने सोशल मीडिया पर किए गए दावे को गलत बताते हुए संबंधित व्यक्ति से अपनी पोस्ट में सुधार करने या उसे हटाने की सलाह दी है।आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि चुनाव आयोग की ओर से ‘बाय वन, गेट वन फ्री’ यानी एक के साथ एक मुफ्त जैसी कोई योजना नहीं चलाई जा रही है।
आयोग ने कहा कि संबंधित पोस्ट में दावा किया गया था कि मतदाता ने केवल दो आवेदन जमा किए थे, जबकि उसे चार मतदाता पहचान पत्र जारी हो गए। आयोग के मुताबिक, यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है, क्योंकि मतदाता ने कुल चार आवेदन जमा किए थे।आयोग ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति उसके तथ्यों पर सवाल उठाना चाहता है, तो वह उन दो आवेदनों के संदर्भ नंबर सार्वजनिक करे, जिन्हें लेकर उसने दावा किया है। इसके बाद आयोग शेष दो आवेदनों के संदर्भ नंबर भी सार्वजनिक करेगा।
चुनाव आयोग ने स्वीकार किया कि एक ही व्यक्ति की ओर से कई आवेदन जमा किए जाने के बाद एक से अधिक मतदाता पहचान पत्र जारी होने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।आयोग के अनुसार, इस तरह के मामलों की पहचान करने और दोहराव को दूर करने के लिए ईसीआईनेट के माध्यम से समय-समय पर दोहराव हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
आयोग ने कहा कि वह ऐसी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे किसी व्यक्ति की ओर से कई आवेदन जमा किए जाने की पहचान आवेदन जमा करने के चरण में ही की जा सके। आयोग ने भरोसा जताया कि इस उद्देश्य को जल्द ही हासिल कर लिया जाएगा।चुनाव आयोग ने संबंधित व्यक्ति को आगाह किया कि आयोग के बारे में तथ्यात्मक रूप से गलत बयान देकर लोगों को उकसाने और एक संवैधानिक संस्था के प्रति नागरिकों में अविश्वास पैदा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
आयोग ने कहा कि संबंधित व्यक्ति को अब तथ्यों की जानकारी दिए जाने के बाद अपनी ओर से उचित जांच-पड़ताल करनी चाहिए और गलती सामने आने पर अपनी पोस्ट में संशोधन करना चाहिए या उसे हटा देना चाहिए।