योगी राज में रामनगरी अयोध्या का हुआ कायाकल्प

अयोध्या, 28 दिसंबर। दशकों तक राजनीतिक दलों के बीच सिर्फ मुद्दा मात्र मानी जाती रही भगवान राम की नगरी अयोध्या का कायाकल्प आज दुनिया के लिये एक मिसाल बन चुका है और पौराणिक नगरी अयोध्या अपने पुरातन वैभव की ओर लौटने लगी है।
कुछ साल पहले तक अयोध्या और राम मंदिर सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा बन कर रह गये थे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भगवान राम के नाम पर राजनीति करने के आरोप विपक्षी दलो के नेताओं की जुबान पर होते थे मगर इन सबके बीच किसी ने भी धार्मिक पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण इस पुरातन नगर के विकास की कोई सुधि नहीं ली। बजबजाती नालियां और संकरी सड़कें अयोध्या का बदहाल स्थिति की गवाह हुआ करती थीं।
2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के विकास की दिशा में अहम पहल की और इस बीच रामजन्मभूमि विवाद का समाधान भी अदालत के आदेश से हो गया। तुष्टिकरण की राजनीति के चलते जिस अयोध्या की ओर राजनेता देखने से भी कतराते थे,योगी ने उसका दिव्य और भव्य स्वरुप लौटाने का संकल्प लिया और आज अद्भुत, अलौकिक और भाग्योदय वाली अयोध्या अपने पुराने वैभव की ओर लौट रही है। यह अयोध्या देश के साथ दुनिया के भी आकर्षण का केंद्र हो गई है। मुगल, ब्रिटिश गुलामी काल और फिर आजादी के बाद से लेकर 2017 तक उपेक्षित रही अयोध्या के दिन योगी सरकार आने के बाद से ही बदलने लगे। 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव ने अयोध्या को भले ही अपनी प्राथमिकता में नहीं रखा, लेकिन उसी अयोध्या का गौरवशाली वैभव लौटाने में मोदी-योगी की डबल इंजन सरकार ने जमीं-आसमां एक कर दिया।
    अयोध्या ने बदलाव के नये प्रतिमान स्थापित किए हैं, जिनकी अब देश व दुनिया में चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के कायाकल्प का जो संकल्प लिया उसकी शुरुआत फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या करने से की गई। इसके बाद अयोध्या को नगर निगम बनाकर इसके पुनरोद्धार की जिस अद्भुत पहल की शुरुआत हुई वो फिलहाल 30 हजार करोड़ से भी अधिक की परियोजनाओं के तेज गति से मूर्तरूप लेने की महान गाथा बन चुकी है। झूलते-लटकते बिजली के जर्जर तार अब पुराने दिनों की बात हो गई। 2017 के पहले जिस अयोध्या को मुकम्मल बिजली भी नहीं दी जाती थी आज वहां 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति हो रही है। सिर्फ इतना ही नहीं सूर्यवंश के राजा श्रीराम की नगरी को सोलर सिटी बनाने का संकल्प भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया है जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।  
   योगी सरकार ने फैजाबाद व अयोध्या नगर पालिका को मिलाकर अयोध्या नगर निगम बनाया। योगी सरकार के इस फैसले पर अयोध्यावासियों ने अपनी मुहर भी लगाई और यहां हुए महापौर के दोनों चुनावों में कमल भी खिलाया। साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ के आह्वान पर यहां भाजपा के अधिकांश पार्षदों को जीत भी दिलाई।
   केंद्र की मोदी व प्रदेश की योगी सरकार के नेतृत्व में अयोध्या का संपूर्ण विकास हो रहा है। यहां लगभग 30 हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाएं चल रही हैं। इसमें से अब तक 4115.56 करोड़ की 50 से अधिक परियोजनाओं को पूर्ण कर लिया गया है। 1462.97 करोड़ की लागत से बने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा व 241 कोरड़ से अयोध्या धाम स्टेशन फेज-1 का विकास कार्य उन प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है, जिनका लोकार्पण पीएम के दौरे पर प्रस्तावित है। अखिलेश सरकार में यहां चिकित्सा व्यवस्था को खुद इलाज की जरूरत थी, लेकिन योगीराज में यहां राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय का 245.64 करोड़ से निर्माण हुआ। नयाघाट पर लता मंगेशकर चौक 75.26 करोड़ से नई आभा के साथ चमक रहा है। राम की पैड़ी पर लाइट एंड साउंड का कार्य 2372.10 लाख से हुआ। राम की पैड़ी के घाट का विस्तार तो हुआ ही, पानी के फ्लो को भी अनवरत किया गया।  
     अयोध्या में दीपोत्सव की सोच अखिलेश सरकार में कोई सोच भी नहीं सकता था, लेकिन योगी आदित्यनाथ ने ना सिर्फ दीपोत्सव का आगाज किया, बल्कि इसके शिल्पकार बनकर साल दर साल इस महाआयोजन को नया आयाम भी दिया। 2017 में दीपोत्सव में जहां 1.71 लाख दीप जले, वहीं 2018 में यह संख्या 3.01 लाख हो गई। 2019 में 4.04 लाख, 2020 में 6.06 लाख, 2021 में 9.41 लाख और 2022 में 15.76 लाख दीप प्रज्ज्वलित कर कीर्तिमान स्थापित किया गया, लेकिन 2013 में यह रिकॉर्ड भी टूटा। यहां 11 जनवरी को दीपोत्सव में 22.23 लाख दीप प्रज्जवलित किए गए। हर वर्ष दीपों के साथ प्रदेश व देश की समृद्धि बढ़ती गई।
     योगी आदित्यनाथ के 2017 में सीएम बनने के बाद भारत के प्रमुख धार्मिक पर्यटनस्थलियों में शीर्ष की ओर बढ़ रही है। 2022 में यहां 2,21,12,402 भारतीय औऱ 26403 विदेशी पर्यटक (कुल 2,21,38,805 पर्यटकों) पहुंचे और इस पावन भूमि के रज को सिर माथे पर लगाया। 2017 में 1.78 करोड़, 2018 में 1.95 करोड़, 2019 में 2.4 करोड़ पर्यटक यहां पहुंचे। 2021 में कोरोना के कहर के बावजूद 1.57 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने अयोध्या आकर पूजन-अर्चन किया।
     2012 से 17 के बीच अयोध्या जैसे प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों में पर्याप्त बिजली ना मिलना आम बात थी। यूपी के कुछ खास जिलों को छोड़ दें तो शेष जिले ‘अंधेरे’ में ही रहते थे, लेकिन योगी सरकार के कुशल प्रबंधन व बिना भेदभाव के योजनाओं का लाभ देने की नीयत ने अयोध्या को भी 24 घंटे बिजली आपूर्ति वाला शहर बना दिया। यहां जर्जर-झूलते तारों से निजात मिल ही रही है। 167 करोड़ रुपये से सिरोपरि लाइनों को तेजी से अंडरग्राउंड किया जा रहा है।
    किसी को भी जानकर आश्चर्य होगा कि  2017 के पहले भगवान श्रीराम के टेंट वाले मंदिर को छोड़िए हनुमानगढ़ी तक भी सीधी-सपाट सड़क नहीं थी। अयोध्या को पूरी तरह से उसके हाल पर छोड़ दिया गया था, लेकिन योगी सरकार में फोर लेन से अयोध्या आज समृद्धि के पथ पर बढ़ रही है। राम जन्मभूमि तक 44. 98 करोड़ की लागत से फोर लेन मार्ग का निर्माण किया गया है। इसके अलावा अयोध्या के चार पथों को विकसित कर योगी सरकार ने इन्हें कोड व रंग प्रदान कर अलौकिक रूप देने का कार्य भी किया है।

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