
पुरुलिया, 30 दिसंबर। पश्चिम बंगाल में जनजातीय समूह (आदिवासी सेंगेल अभियान-एएसए) ने जनगणना में सरना धर्म को मान्यता देने और अन्य मांगों के आह्वान पर शनिवार तड़के करीब छह बजे से 12 घंटे के ‘भारत बंद’ के कारण दक्षिण पूर्व रेलवे के हावड़ा-चक्रधरपुर डिवीजन में ट्रेन सेवाएं बाधित हो गईं।
आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि ‘रेल रोको’ आह्वान पर कटाडीह स्टेशन के ट्रैक पर एएसए के कार्यकर्ता बैठ गए, जिससे रांची-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस सहित ट्रेन सेवाएं बाधित हो गईं। इस दौरान, एएसए के सदस्य पोस्टरों पर हाथ से लिखी अपनी मांगों को लेकर रेल पटरियों पर उतर आए।
सूत्रों ने बताया कि किसी भी हिंसा की कोई रिपोर्ट नहीं है, न ही इस संबंध में कोई गिरफ्तारी हुई। एएसए ने बुधवार को जनगणना में सरना धर्म को मान्यता देने की अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग को दबाने के लिए आज “प्रतीकात्मक” भारत बंद की घोषणा की। सरना आदिवासी समुदायों की मूल आस्था है, जो प्राकृतिक तत्वों की पूजा करते हैं।
एएसए के अध्यक्ष सालखन मुर्मु ने कहा कि सरना भाषा करीब 15 करोड़ आदिवासियों की पहचान है, जिसे मान्यता नहीं दी गयी।
एएसए ने आरोप लगाया कि झारखंड में परेशनाथ पहाड़ को भी बेच दिया गया, जिसे रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि वे पहाड़ियों की पूजा करते हैं।
सूत्रों ने कहा कि रांची से होरा जाने वाली ‘वंदे भारत’ के अलावा, कई अन्य लंबी दूरी की यात्री ट्रेनों को एसईआर खंड पर कई बिंदुओं पर रोक दिया गया है।इस व्यवधान के अलावा, एसईआर ने खड़गपुर स्टेशन पर काम के कारण पुरी-हावड़ा-पुरी शताब्दी एक्सप्रेस और बालासोर-भद्रक-बालासोर मेमू स्पेशल को रद्द करने की भी घोषणा की।