श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ,देश को सांस्कृतिक स्वतंत्रता मिलेगी:रामदेव

अयोध्या, 21 जनवरी : योग गुरु स्वामी रामदेव ने रविवार को कहा कि वर्ष 1947 में देश को राजनीतिक आजादी मिली थी लेकिन अब श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही, देश को सांस्कृतिक स्वतंत्रता मिलने जा रही है।
अयोध्या में श्री राम लला मन्दिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने आए संतों ने रविवार को यहां पवित्र सरयू की राम की पैड़ी पर संवाददाताओं से बातचीत की। इस दौरान, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन से लेकर देश के साधु संतों के योगदान और राजनीति पर भी उन्होंने बात की।
स्वामी रामदेव ने इस सम्मेलन की शुरुआत करते हुए कहा कि वर्ष 1947 में देश को राजनीतिक आजादी मिली थी, लेकिन अब श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही, देश को सांस्कृतिक स्वतंत्रता मिलने जा रही है। इसका सभी देशवासी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
स्वामी रामदेव ने प्राण प्रतिष्ठा के मुहूर्त के सन्दर्भ में कहा कि मंदिर निर्माण स्वयं प्रभु की इच्छा से हो रहा है और प्राण प्रतिष्ठा जब श्रीराम की हो तो सभी मुहूर्त दिव्य हो जाते हैं। इससे जुड़े सवाल करने वाले लोग अज्ञानी हैं।
इस अवसर पर, साध्वी ऋतंभरा ने मंदिर आंदोलन के दिनों को याद करते हुए कहा कि प्राण प्रतिष्ठा हो रही है, लोग पूछते हैं कि इसका श्रेय किसे दिया जाए। उन्होंने बताया कि इसमें असंख्य रामभक्तों का रक्त बहा है। कई माताओं के पुत्र छिने हैं, कइयों का सिंदूर मिटा है। घरों के आंगन सूने हो गए तब जाकर ये दिन देखने को मिला है। इस बीच उन्होंने कई ओजस्वी कविताओं का पाठ भी किया। इस दौरान, डॉ. परमात्मा नंद सरस्वती, ज्ञानानंद महाराज, निर्मला नंद नाथ, माधव प्रिय दास, आचार्य कृष्ण मणि दास, संतोष दास (सतुआ बाबा) व आलोक दास मौजूद रहे।

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