
प्रयागराज,09 फरवरी। दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माघ मेला के सबसे बड़े मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर दो कराेड़ 18 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगायी।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मौनी अमावस्या पर दो करोड़ 18 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर संगम में आस्था की डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा किया गया।
इटली से आए संगम में 11 सदस्यों का ग्रुप माघ मेला में पहुंचकर स्नान किया। मेले का लुत्फ लिया। पर्यटकों ने यहां की भीड़ पर नियंत्रण की व्यवस्था देखकर प्रसन्नता व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि वे संगम के बारे में बहुत कुछ सुना था लेकिन आज देखकर बडी प्रसन्नता हुई। इतनी भीड़ के बावजूद व्यवस्था दुरूस्त होने पर उन्होंने मेला प्रशासन और यूपी पुलिस की प्रशंसा किया।
माघ मेले में ओल्किड जी टी रोड संगम लोअर मार्न्नग पर किन्नर अखाड़े के शिविर में भोर में आग लगने से काफी नुकसान हुआ। तीन लोग झुलस गये जिसका उपचार के लिए एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। माघ मेला में अभी तक तीन स्थानों पर आग से शिविर में रखे आनानज, कपड़े और पैसे सभी जलकर नष्ट हो चुके हैं।
स्नान का क्रम आधी रात के बाद से श्रद्धालुओं ने शुरू कर दिया था। हालांकि सुबह शीतलहरी को भी धता बताकर श्रद्धालुओं ने स्नान करते रहे। महिला, पुरूष, बच्चे और युवा सभी हर हर गंगे, ऊं नम: शिवाय का जाप कर रहे थे तो कुछ लोग मौन होकर डुबकी लगा रहे थे। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद सूर्य भगवान को अर्ध्य दिया, संगम में दूध चढाया, पुरूप और दीपक से गंगा मां की आरती कर परिवार की सुख, समृद्धि के लिए गंगा याचना किया। सड़क किनारे बैठे भिक्षुकों को दान भी किया।
संगम तट पर अनेकता में एकता दिखलायी पड़ा। किसी से किसी को कोई मतलब नहीं बस मां गंगा की गोद में पहुंचने को श्रद्धालुओं की व्याकुलता दिखलायी पड़ रही थी।
संगम की ओर जाने वाले हर मार्ग पर आस्था की लहरे हिलोरे मार रहीं थी। स्नान के लिए कल्पवासियों के घर से आए रिश्तेदारों और परिजनों से शिविर गुलजार हो गये। मकर संक्रांति एवं पौष पूर्णिमा से कल्पवास कर रहे कल्पवासियों के शिविरों में जश्न जैसा माहौल रहा।
मौनी अमावस्या पर्व से एक दिन पहले ही रेलवे ने प्रयागजंक्शन के सिविल लाइंस साइड़ श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी जिससे उन्हें बहुत परेशान होना पड़ा। स्नानार्थियों की भीड़ रेलवे और बस स्टेशनों पर नजर आ रही थी। इसमें ग्रामीणों की संख्या अधिक थी। उततर प्रदेश के अलावा निकटवर्ती राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, बिहार और झारखंड तक के श्रद्धालुओं की भारी आमद रही।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता वृजेश कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं को निर्मल जल में आस्था की डुबकी लगाने के लिए एक सप्ताह पहले ही नौ हजार क्यूसेक से अधिक पानी बैराजों से छोड़ा गया था जिसके पहुंचने पर गंगा और यमुना के जल में थोड़ी वृद्धी हुई है।
सुरक्षा के कड़े बन्दोबस्त किए गये थे। पूरे मेले में 600 सीसीटीजव कैमरे और हाईटेक ड्रोन कैमरे से मेला क्षेत्र में नजर रखी जा रही है। इसके अलावा पीएसी, एनडीआरएफ, एक कम्पनी एसटीएफ की यूनिट और एटीएस कमांडो, बम डिस्कोपोजल स्क्वायड और आरएएफ के जवान तैनात किए गये थे।