
कान, 24 मई : भारतीय फिल्म निर्माता चिदानंद एस. नाइक की फिल्म ‘सनफ्लावर्स वर द फर्स्ट वन टू नो’ ने 77 वें कान फिल्म फेस्टिवल में ला सिनेफ का पहला पुरस्कार जीत लिया है जबकि मानसी माहेश्वरी की फिल्म “बनीहुड”को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है।
“सनफ्लावर वेयर द फर्स्ट वन्स टू नो” (मूल कन्नड़ शीर्षक सूर्यकांतिहूगे मोधालुगोथागिधु है) 16 मिनट की कन्नड़ लघु फिल्म एक बंजारा लोक कथा पर आधारित है। इस फिल्म को मैसूर के चिदानंद एस. नाइक ने निर्देशित किया है। भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई), पुणे द्वारा प्रविष्टि की गयी है।
श्री नाइक ने कहा, ” फिल्म एक दादी की कहानी बताती है जो सोचती है कि सूरज उसके मुर्गे की वजह से उगता है। अनादर करने वाले ग्रामीणों को सबक सिखाने के लिए वह मुर्गे को लेकर जंगल में गायब हो जाती है।
“सनफ्लावर वेयर द फर्स्ट वन्स टू नो” को प्रथम पुरस्कार के लिए 15 हजार यूरो (लगभग 13.5 लाख रुपये) जबकि एनीमेशन शॉर्ट फिल्म “बनीहुड” को 7,500 यूरो (लगभग सात लाख रुपये) प्राप्त होगा।
उत्तर प्रदेश के मेरठ में जन्मीं सुश्री माहेश्वरी ब्रिटेन में नेशनल फिल्म एंड टेलीविजन स्कूल (एनएफटीएस) की छात्रा हैं।
अमेरिका में कोलंबिया विश्वविद्यालय की अस्या सेगलोविच की “आउट ऑफ द विंडो थ्रू द वॉल” और ग्रीस में थेसालोनिकी के अरस्तू विश्वविद्यालय के निकोस कोलियोकोस की “द कैओस शी लेफ्ट बिहाइंड” फिल्म ने को संयुक्त रुप से दूसरा पुरस्कार मिला है और उसकी पुरस्कार राशि 11,250 यूरो (लगभग 10 लाख रुपये) है।
“बन्नीहुड” नौ मिनट की एक एनिमेशन फिल्म है, जो फिल्म निर्माता और उनकी मां के बीच के रिश्ते को दर्शाती है।
भारत की दो लघु फिल्म “सनफ्लावर वेयर द फर्स्ट वन्स टू नो” और “बनीहुड” को दुनिया भर के 555 फिल्म स्कूलों द्वारा प्रस्तुत 2,263 प्रविष्टियों में से चुना गया है।