
इटावा, 5 मई लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) के नेताओं द्वारा परिवारवाद की राजनीति के तंज को दरकिनार करते हुये उत्तर प्रदेश की जनता ने देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार के पांच सदस्यों को एक साथ संसद भेजने का फैसला सुनाया है।
इटावा जिले में सैफई के यादव परिवार के पांच सदस्यों ने 2024 के संसदीय चुनाव में जीत दर्ज करके एक नया रिकॉर्ड बनाया है। खेत,खलिहान,किसान और कमजोर तबकों की राजनीति करने वाले मुलायम परिवार के सदस्य अब एक सुर से सदन में इन वर्गों से जुड़े हुए मुद्दों को रखेंगे।
राजनीतिक विश्लेषक गुलशन कुमार ने कहा कि देश और उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले मुलायम परिवार के पांच निर्वाचित सांसद जब संसद में किसी मुद्दे पर चर्चा करेगे तो जाहिर है कि बड़ा ही रोचक प्रसंग बन पड़ेगा। लोकसभा का यह पहला मौका होगा जब देश के किसी भी राजनीतिक परिवार से एक साथ पांच सांसद निर्वाचित हुए हो।
2024 के संसदीय चुनाव में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने खुद समेत पांच सदस्यों को चुनाव मैदान में उतारा था जिसमें सभी पांचो की जीत हो गई है। अपने परिवार के पांच सदस्यों के संसदीय चुनाव मैदान में उतारे जाने का भी वाक्या कम दिलचस्प नही है। होली के अवसर पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव भारतीय जनता पार्टी के परिवारवाद का जिक्र करते हुए बोले कि अब वो भी अपने परिवार को संसदीय चुनाव में उतारेंगे जिसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक-एक करके परिवार के पांच सदस्यों को चुनाव मैदान में उतारा।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद अपनी परंपरागत सीट कन्नौज से चुनाव मैदान में उतरे तो अपनी पत्नी डिंपल यादव को मैनपुरी संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतारा वही अपने चचेरे भाई पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव को आजमगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा तो पूर्व सांसद अक्षय यादव को फिरोजाबाद संसदीय सीट और पहली दफा अपने चचेरे भाई आदित्य यादव को बदायूं संसदीय सीट से चुनाव मैदान में सपा उम्मीदवार के रूप में किस्मत आजमाने उतारा।
अखिलेश यादव करीब डेढ़ दशक बाद कन्नौज संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतरे जहां उन्हें भाजपा के सुब्रत पाठक के मुकाबले जीत हासिल हुई है। 2002 में अखिलेश यादव पहली दफा कन्नौज संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतरे थे तब उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के अकबर अहमद डंपी को पराजित किया था। जिसके बाद से लगातार निर्वाचित होते हुए चले आए । 2012 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार बनने पर अखिलेश यादव ने सांसद पद से इस्तीफा दिया तो उनकी पत्नी डिंपल यादव निर्विरोध निर्वाचित हुई लेकिन 2019 में हुए संसदीय चुनाव में डिंपल यादव भाजपा के सुब्रत पाठक के मुकाबले मामूली अंतर से पराजित हो गई।
मैनपुरी संसदीय सीट से अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने योगी सरकार के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को पराजित किया है। श्री मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके उत्तराधिकारी के रूप में डिंपल यादव को चुनाव मैदान में उतारा गया जिसमे डिंपल यादव ने भाजपा के रघुराज सिंह शाक्य को करीब दो लाख 88 हजार मतों से पराजित कर दिया।
फिरोजाबाद संसदीय सीट से पूर्व सांसद अक्षय यादव को जीत मिली है। उन्होंने अपने निकटतम विरोधी भाजपा के ठाकुर विश्वदीप सिंह को पराजित किया। अक्षय यादव 2014 में पहली दफा फिरोजाबाद संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतरे थे जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई थी 2019 में फिर से उन्होंने चुनाव मैदान में उतारकर के किस्मत आजमाई लेकिन समाजवादी परिवार में चल रहे अलगाव के चलते शिवपाल सिंह यादव के उतर जाने के कारण अक्षय यादव पराजित हो गए और चंद्रसेन जादौन की जीत हो गई लेकिन नेताजी के निधन के बाद शिवपाल सिंह यादव ने अच्छे यादव को एक बार फिर से संसद पहुंचने का प्रण किया और फिरोजाबाद संसदीय क्षेत्र में की जान से चुनाव प्रचार में जताते हुए अपने भतीजे अक्षय यादव को संसद में पहुंचने की पुरजोर अपील की नतीजे के तौर पर अक्षय यादव एक बार फिर से सांसद निर्वाचित हो गए।
पूर्वी उत्तर प्रदेश की आजमगढ़ संसदीय सीट से पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव को समाजवादी पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया था धर्मेंद्र यादव ने भारतीय जनता पार्टी के दिनेश लाल यादव को पराजित किया है। आजमगढ़ सीट से 2019 के संसदीय चुनाव में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जीत हासिल की थी इसके बाद उन्होंने इस सीट को छोड़ दिया तब धर्मेंद्र यादव ने उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में किस्मत आजमाई लेकिन उपचुनाव में उन्हें भाजपा के दिनेश लाल यादव के मुकाबले हार का सामना करना पड़ा। जिसके बाद एक बार फिर से धर्मेंद्र यादव को आजमगढ़ सीट से उतर गया जहां उन्हें रिकार्ड मतों से जीत हासिल हुई है।
सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव को बदायूं संसदीय सीट से चुनाव मैदान में पहली दफा उतारा गया, आदित्य यादव ने संसदीय चुनाव की पहली पायदान पर ही कामयाबी हासिल कर ली है, आदित्य यादव ने कांटे के संघर्ष में भाजपा उम्मीदवार दुर्विजय सिंह शाक्य को पराजित कर दिया है। आदित्य के स्थान पर पहले शिवपाल सिंह यादव का नाम घोषित किया गया था लेकिन नामांकन के आखिरी दिन आदित्य यादव के नाम की घोषणा कर दी गई, आदित्य यादव को नवोदित मानते हुए हार जीत की चर्चाएं भी मतगणना के आखिरी तक चलती रही लेकिन फाइनल नतीजे पर आदित्य यादव की ही जीत हुई है।
बदायूं संसदीय सीट से साल 2014 में धर्मेंद्र यादव सांसद निर्वाचित हो चुके हैं जबकि 2019 के संसदीय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की संघमित्रा मौर्य के मुकाबले धर्मेंद्र यादव पराजित हो गए।
सं प्रदीप
वार्ता