फिडे शतरंज ओलंपियाड में भारत ने पुरुष और महिला वर्ग का जीता खिताब

फिडे शतरंज ओलंपियाड में भारत ने पुरुष और महिला वर्ग का जीता खिताब

बुडापेस्ट 22 सितंबर : भारतीय पुरुष टीम के बाद रविवार को हरिका द्रोणावल्ली, आर वैशाली, दिव्या देशमुख, वंतिका अग्रवाल और तानिया सचदेव की महिला टीम ने भी हंगरी में खेली जा रही 45वें फिडे शतरंज ओलंपियाड 2024 स्पर्धा का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। इसी के साथ भारत ने इस स्पर्धा का दोहरा खिताब अपने नाम कर लिया है।

    हरिका द्रोणावल्ली, वैशाली रमेशबाबू, दिव्या देशमुख, वंतिका अग्रवाल, तानिया सचदेव और अभिजीत कुंटे की भारतीय महिला टीम की जीत ओपन वर्ग में अमेरिका के कजाकिस्तान को हारने पर निर्भर थी। अमेरिका और कजाकिस्तान के बीच मुकाबला 1-1 से बराबरी पर रोकने के बाद भारत को विजेता घोषित किया गया।

    इससे पहले भारतीय महिलाओं ने चीन को 2.5-1.5 से हराकर संयुक्त बढ़त हासिल कर ली। ऐसा पहली बार नहीं हुआ, दिव्या देशमुख शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय महिला टीम की नायिका बनीं।
      भारत के साथ कजाकिस्तान भी तालिका में शीर्ष पर था। कजाकिस्तान ने जॉर्जिया के साथ 2-2 से ड्रा खेला। भारत और कजाकिस्तान के 17-17 अंक हैं और उसके बाद अमेरिका और पोलैंड थे। अंतिम दौरान में भारत ने अजरबैजान को 3.5-0.5 से हराया। इसके बाद अमेरिका और कजाकिस्तान का मुकाबला ड्रा रहा, जिसके बाद भारत को विजयी घोषित किया गया।

     इसी के साथ फिडे शतरंज ओलंपियाड 2024 में भारत ने दो स्वर्ण पदक अपने नाम किये है। पुरुष टीम में डी गुकेश, आर प्रज्ञानंदधा, अर्जुन एरिगैसी, विदित गुजराती और पेंटाला हरिकृष्णा ने ओपन वर्ग में जीत हासिल की, जबकि हरिका द्रोणावल्ली, आर वैशाली, दिव्या देशमुख, वंतिका अग्रवाल और तानिया सचदेव की महिला टीम ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। हरिका द्रोणावल्ली ने गुने मम्मादजादा को हराया। आर वैशाली ने उलविया फतालियेवा को ड्रा कराया। वंतिका अग्रवाल ने खानिम बालाजायेवा को हराया।

   अमेरिकी खिलाड़ियों के खिलाफ भारत की जीत का श्रेय डी. गुकेश को जाता है, उन्होंने शीर्ष बोर्ड पर दुनिया के तीसरे नंबर के खिलाड़ी फैबियानो कारूआना को हराया। गुकेश ने लगभग 30 चालों में प्लस 3.33 की बढ़त हासिल कर अगले दस चालों में अपने प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ते हुए जीत सुनिश्चित की। डी गुकेश और अर्जुन एरिगैसी की जीत से उन्हें स्लोवेनिया पर 2-0 की बढ़त मिल गई है। इसका मतलब यह था कि भारत हार नहीं सकता था और टीम को स्टैंडिंग में चीन पर अजेय बढ़त हासिल करने के लिए अपने विरोधियों के खिलाफ केवल ड्रॉ की जरूरत थी।

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