बांग्लादेश के खिलाफ तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं कुलदीप

बांग्लादेश के खिलाफ तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं कुलदीप

कानपुर 26 सितंबर : बांग्लादेश के खिलाफ शुक्रवार से शुरु होने वाले दूसरे टेस्ट मैच में मौका मिलने पर चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव भारतीय टीम के लिये तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं।
      कानपुर में स्पिनरों के लिये मददगार मानी जाने वाली ग्रीनपार्क की धीमी विकेट पर भारत और बांग्लादेश तेज गेंदबाजों की बजाय अपने स्पिन आक्रमण पर अधिक भरोसा कर सकती हैं, ऐसे में लोकल ब्वाय कुलदीप यादव को मौका मिलने के पूरे आसार हैं। इसी साल मार्च में कुलदीप ने इंग्लैंड के खिलाफ धर्मशाला टेस्ट में शानदार प्रदर्शन कर सात विकेट चटकाये थे जिसकी बदौलत भारत ने यह मैच मात्र तीन दिन में पारी और 64 रन से अपने नाम कर लिया था। इसके लिये वह प्लेयर आफ द मैच भी चुने गये थे हालांकि इसके बाद आश्चर्यजनक तरीके से मौजूदा सीरीज के पहले टेस्ट में उन्हे नजरअंदाज कर दिया गया था।
      अपनी तेज रफ्तार अबूझ गेंदों के जरिये कुलदीप अक्सर विरोधी बल्लेबाजों के लिये खासी परेशानी खड़ी करते रहे हैं। कुलदीप ने बांग्लादेश के खिलाफ अपना पिछला टेस्ट मैच चटगांव में 2022 में खेला था और अपनी बेमिसाल गेंदबाजी के बूते भारत को आसान जीत दिलायी थी। इस मैच में भी उन्हे प्लेयर आफ द मैच चुना गया मगर इस बार भी उन्हे मीरपुर में खेले गये अगले टेस्ट में जगह नहीं मिली थी।
    कुलदीप के गुरु कपिल पांडे भी इस तथ्य से इत्तिफाक रखते हैं। उन्होने कहा “ कुलदीप अपनी शानदार फार्म से गुजर रहा है। जसप्रीत बुमराह के बाद वह मौजूदा भारतीय टीम का ऐसा गेंदबाज है जो किसी खास पिच का मोहताज नहीं है बल्कि किसी भी तरह की पिच पर बल्लेबाजों पर कहर बरपा सकता है मगर यह विडंबना है कि जब जब उसे प्लेयर आफ द मैच चुना जाता है, उसे अगले मैच में इसका इनाम अंतिम एकादश से बाहर रख कर दिया जाता है।”
     उन्होने कहा “ बांग्लादेश के बल्लेबाजों ने पिछले दो साल से कुलदीप का सामना नहीं किया है, ऐसे में कुलदीप को उसके घरेलू मैदान में खेलना मेहमान बल्लेबाजों के लिये किसी चुनौती से कम नहीं होगा।  मुझे उम्मीद है कि कानपुर की स्लो विकेट पर कुलदीप को तवज्जो दी जायेगी। ग्रीनपार्क की विकेट पर खेल कर वह बड़ा हुआ है और स्थानीय दर्शकों के सामने खेलने का उत्साह ही कुछ अलग होता है।”
     कपिल ने कहा “ यह कहना गलत होगा कि बल्लेबाजी की वजह से कुलदीप अंतिम एकादश में जगह बनाने में विफल रहता है। आप आंकड़ों पर नजर डालें तो क्रिकेट की किसी भी फार्मेट में जब भी टीम को जरुरत होती है,कुलदीप रन बनाने में सफल रहता है। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उसका शतक भी इसका प्रमाण है।”

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