गुणवत्ता पर ध्यान देकर ब्रांड इंडिया को मजबूत करें विनिर्माता: गोयल

गुणवत्ता पर ध्यान देकर ब्रांड इंडिया को मजबूत करें विनिर्माता: गोयल

नयी दिल्ली, 29 सितंबर : “मेक इन इंडिया” पहल के एक दशक पूरे होने पर, वाणिज्य और उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल ने रविवार को यहां भारतीय उद्योग जगत के साथ एक बैठक में  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  के आह्वान के अनुरूप स्वास्थ्य प्रथाओं के माध्यम से ब्रांड इंडिया को बढ़ावा देने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले सामानों के उत्पादन को प्राथमिकता देने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
श्री गोयल ने इस अवसर पर विनिर्माण उद्योग से  “शून्य पर्यावरणीय प्रभाव” और “शून्य त्रुटि” के साथ मेक इन इंडिया अभियान को तेजी से आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने इस संवाद सत्र में 140 से अधिक पीएलआई लाभार्थी कंपनियों के सीईओ के साथ बातचीत करते हुए, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत उनकी उपलब्धियों को उत्साह जनक बताया।
श्री  गोयल ने पीएलआई लाभार्थी कंपनियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पीएलआई योजना के तहत काम कर रही कंपनियां महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने, नौकरियां पैदा करने और भारत को विनिर्माण क्षेत्र में वैश्विक शक्ति  के रूप में स्थापित करने में सहायक रहे हैं।उन्होंने कंपनियों के सीईओ से भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपने उत्पादों में घरेलू मूल्यवर्धन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। श्री गोयल ने उद्योग जगत से इस संबंध में घरेलू विनिर्माताओं का समर्थन करने का भी आग्रह किया।
तीन घंटे की लंबी बातचीत के दौरान, लाभार्थी कंपनियों के सीईओ ने पीएलआई योजनाओं पर अपने दृष्टिकोण साझा किए, योजनाओं की प्रभावशीलता में सुधार और कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करने के लिए अपने अनुभवों, सफलता की कहानियों और सुझावों में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान की।
बातचीत के बीच सभी प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री के मन की बात के प्रसारण के 114वें संस्करण को देखा, जिसमें  श्री मोदी ने बताया कि कैसे “मेक इन इंडिया” अभियान ने भारत को एक विनिर्माण महाशक्ति बनाने में योगदान दिया है जिसके परिणामस्वरूप निर्यात में वृद्धि हुई है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में निरंतर वृद्धि के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, कपड़ा, विमानन, ऑटोमोबाइल और अन्य क्षेत्रों में भारत मजबूत हुआ है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश अब “गुणवत्ता: वैश्विक मानकों के उत्पाद” और “वोकल फॉर लोकल: स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने” पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
बैठक के दौरान पीएलआई योजनाओं की समग्र उपलब्धि पर भी चर्चा की गई।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार पीएलआई योजना के टारगेट अंतर्गत वास्तविक निवेश  1.46 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है  और अगले साल तक यह दो लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। इस प्रोत्साहन योजना इसके परिणामस्वरूप उत्पादन/बिक्री 12.50 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ गई है और लगभग 9.5 लाख (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) रोजगार सृजन हुआ है जिसके जल्द ही 12 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है।  इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और खाद्य प्रसंस्करण जैसे प्रमुख क्षेत्रों की पीएलआई इकाइयों के पर्याप्त योगदान के साथ इस योजना में कुल मिलाकर निर्यात कारोबार भी चार लाख करोड़ रुपए का रहा है।

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