प्रवासी पक्षियो के करलव से गुलजार हुई चंबल घाटी

प्रवासी पक्षियो के करलव से गुलजार हुई चंबल घाटी

इटावा , 2 दिसंबर । अपनी नसैर्गिक सुंदरता के लिये विख्यात चंबल घाटी इन दिनो प्रवासी पक्षियो के करलव से गुंजायमान है। ऊबड़ खाबड़ बीहड़ के बीच कल-कल बहती चंबल नदी में हजारों की संख्या में सुदूर देशाें से आये विदेशी मेहमानो को अठखेलियां लगाते देखा जा सकता है।
      चंबल सेंचुरी की जिला वनाधिकारी चांदनी शर्मा ने सोमवार को कहा कि नवंबर से ही पक्षियों के आने की शुरुआत एक अच्छा संकेत है । सेंचुरी में अफगानिस्तान, पाकिस्तान, श्रीलंका तथा म्यांमार से विदेशी पक्षी आ रहे हैं । इनकी उचित देखभाल की व्यवस्था की गई है।
     राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी की वादियों में विदेशी पक्षियों का करलव गूंज रहा है । 425 किमी क्षेत्रफल में फैली इस सेंचुरी में प्रवासी पक्षियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है । अब हवासीर (पेलिकन), राजहंस (फ्लेमिंगो), समन (बार हेडेटबूल) जैसे विदेशी पक्षी चार महीने मार्च तक यहीं डेरा जमाए रहेंगे । इन आकर्षक पक्षियों को देखने वालों की तादात भी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है।
      चंबल सेंचुरी का महत्व सर्दी के मौसम में अपने आप ही बढ़ जाता है क्योंकि चंबल सेंचुरी में कई लाख प्रवासी पक्षी सर्दी के मौसम में सालों दर साल से आ रहे है। दुर्लभ जलचरों के सबसे बड़े संरक्षण स्थल के रूप में अपनी अलग पहचान बनाये चंबल सेंचुरी को इटावा आने वाले पर्यटक देख पाने में कामयाब होगे । तीन राज्यों में फैली चंबल सेंचुरी का महत्व इतना है कि चंबल सेंचुरी में डॉल्फिन, घड़ियाल, मगर और कई प्रजाति के कछुए तो हमेशा रहते ही साथ ही कई ‘माईग्रेटी बर्ड’ भी साल भर रह करके चंबल की खूबसूरती को चार चाँद लगाती रहती है।
     कश्मीर में ये पक्षी ज्यादातर चीन, यूरोप और सेंट्रल एशिया से आते हैं। पक्षियों का कलरव रोमांचित करने के साथ उर्जा देने वाला होता है और यदि यह कलरव चंबल सेंचुरी के अलावा आसपास के इलाकों में भी प्रवासी पक्षियों की अठखेलियां मन को खूब भा रही है। यहां प्रवासी पक्षी बरबस पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं । इन स्थलों पर प्रवासी पक्षियों का डेरा सुंदरता व दृश्य को और भी मनोरम बना देता है।
     सोसायटी फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर के महासचिव डॉ. राजीव चौहान ने उम्मीद जतायी कि इस बार चंबल में प्रवासी पक्षियों की संख्या में काफी वृद्धि होने की संभावना है। अब तक प्रवासी पक्षियों में कामनटील, नार्दन शिवेलर, ग्रेट कारमोरेंट, टफटिड डक, पोचार्ड आदि दर्जनों प्रजातियों के सुंदर संवेदनशील पक्षी यहां पहुंच चुके हैं। इसके अलावा इटावा के छोटे-छोटे वेटलैंडों के अलावा खेत खलिहानों व यमुना क्वारी, सिंधु जैसी नदियों में भी प्रवासी पक्षियों के झुंड आकर्षण बने हुए हैं।
     चंबल सहसों सेतु, डिभौली सेतु, पचनदा, बाबा सिद्धनाथ मंदिर आदि घाटों पर इन प्रवासी मेहमानों ने डेरा जमा रखा है । चम्बल क्षेत्र में भरेह तथा यमुना क्षेत्र में कसौआ इन प्रवासी पक्षियों के आने के प्रमुख स्थान हैं। हालांकि पूरे चम्बल क्षेत्र में प्रवासी पक्षी आते जाते हैं लेकिन इन दो स्थानों पर ज्यादा संख्या में प्रवासी प्रक्षियों को देखा जा सकता है । चंबल में भरेह तथा यमुना क्षेत्र में कसौआ इन प्रवासी पक्षियों के आने के प्रमुख स्थान हैं । हालांकि पूरे चंबल में प्रवासी पक्षी आते-जाते हैं,लेकिन इन दो स्थानों पर ज्यादा संख्या में प्रवासी प्रक्षियों डेरा रहता है । यहां आने वाले पक्षियों में ब्रामनीडक को सबसे ज्यादा खूबसूरत माना जाता है । इसे अपने देश की भाषा में सुरखाव भी माना जाता है। इसके अलावा स्पूनवी हॉक, लार्ज कारमोरेन, स्मॉल कारमोरेन और डायटर (स्नेक वर्ड) आकर्षण का केंद्र बने हैं।

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