
लखनऊ, 20 मई । उत्तर प्रदेश के कबीना मंत्री संजय निषाद ने आरक्षण के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछड़ों का हक मारकर धर्म के आधार पर आरक्षण देने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि संविधान सभा ने भी इसका विरोध किया था।श्री निषाद ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि अखिलेश यादव की हालिया प्रेस कांफ्रेंस से पीडीए की राजनीति का वास्तविक एजेंडा सामने आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर “डाका डालने” का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “जब संविधान सभा में आरक्षण पर चर्चा हुई थी, तब धर्म के आधार पर आरक्षण देने से मना कर दिया गया था। मुगलों और अंग्रेजों ने भारत पर आक्रमण किया था, इसलिए मुगलों द्वारा लाए गए धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी इसका विरोध किया था।”
संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि जस्टिस रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों के माध्यम से ओबीसी आरक्षण में से हिस्सा काटकर मुसलमानों को आरक्षण देने की कोशिश की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में कांग्रेस ने मुस्लिम जातियों को ओबीसी श्रेणी में शामिल कर पिछड़ों के अधिकारों को कमजोर किया।पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां 118 मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल किया गया था, जिसे बाद में कोलकाता हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। उन्होंने दावा किया कि पिछड़ों के अधिकारों के मुद्दे पर जनता ने वहां सरकार को सबक सिखाया।
उन्होंने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी इसी तरह तुष्टिकरण की राजनीति करती रही, तो उसका भी वही हाल होगा जो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का हुआ। संजय निषाद ने पूर्व सांसद फूलन देवी का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उन्होंने आरक्षण और किसानों के अधिकारों की बात की थी, तब उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और यह एनडीए सरकार का संकल्प है।