सरकारी नौकरी करना चाहते थे राजेश रोशन

सरकारी नौकरी करना चाहते थे राजेश रोशन

मुंबई, 24 मई । बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार राजेश रोशन अपने संगीतबद्ध गीतों से लगभग पाँच दशक से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं, लेकिन वे संगीतकार नहीं बनना चाहते थे, बल्कि सरकारी नौकरी करना चाहते थे। राजेश रोशन का जन्म 24 मई को मुंबई में हुआ। उनके पिता रोशन लाल नागरथ फिल्म इंडस्ट्री के नामी संगीतकार थे। घर में संगीत का माहौल रहने के बावजूद उनकी संगीत में कोई रुचि नहीं थी। उनका मानना था कि संगीतकार बनने की बजाय 10 से 5 बजे की सरकारी नौकरी करना बेहतर है, जिससे जीवन अधिक सुरक्षित रहेगा। उनकी माता इरा रोशन भी एक गायिका थीं। राजेश रोशन ने अपने माता-पिता के अलावा उस्ताद फैज अहमद खान से संगीत की शिक्षा ली।सत्तर के दशक में राजेश रोशन संगीतकार लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल के सहायक के तौर पर काम करने लगे। उन्होंने लगभग पाँच वर्ष तक उनके साथ काम किया।राजेश रोशन ने संगीतकार के रूप में अपने सिने करियर की शुरुआत 1974 में महमूद की फिल्म कुंवारा बाप से की, लेकिन कमजोर पटकथा के कारण फिल्म टिकट खिड़की पर बुरी तरह असफल रही। राजेश रोशन की किस्मत का सितारा 1975 में प्रदर्शित फिल्म जूली से चमका। इस फिल्म में उनके संगीतबद्ध गीत “दिल क्या करे जब किसी को किसी से प्यार हो जाए”, “माय हार्ट इज बीटिंग”, “ये रातें नई पुरानी” और “जूली आई लव यू” श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुए। इस फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने बतौर संगीतकार अपनी पहचान बनाई।

लगभग चार वर्ष तक मुंबई में संघर्ष करने के बाद राजेश रोशन को 1979 में अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म मिस्टर नटवरलाल में संगीत देने का अवसर मिला। इस फिल्म का गीत “परदेसिया ये सच है पिया” उस समय श्रोताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन द्वारा गाया गया गीत “मेरे पास आओ मेरे दोस्तों, एक किस्सा सुनो” भी काफी चर्चित हुआ।राजेश रोशन अब तक दो बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं। वर्ष 1975 में फिल्म जूली के लिए और वर्ष 2000 में फिल्म कहो ना प्यार है के लिए उन्हें यह पुरस्कार मिला। अपने पाँच दशक के करियर में उन्होंने लगभग 150 फिल्मों के लिए संगीत निर्देशन किया है।

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