
चंडीगढ़, 24 मई। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने विश्व स्किजोफ्रेनिया जागरुकता दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान , झज्जर द्वारा आयोजित एक वेबिनार मे उपस्थित आशा वर्करों को वर्चुअली संबोधित करते हुए बताया कि विश्व स्तर पर लगभग 2.4 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं।उन्होंने कहा कि हर 300 में से एक व्यक्ति इससे ग्रस्त है। मरीजों को सही इलाज और पारिवारिक सहयोग मिल जाये, तो वे भी सामान्य जीवन जी सकते हैं। आपदा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. पुरोहित ने बताया कि स्किजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है, जिसका समय रहते उपचार संभव है। इस रोग से पीडित मरीज भ्रम, डर, असामान्य व्यवहार और भावनात्मक दूरी जैसी समस्याओं से जूझता है। समय पर पहचान होने से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ पुरोहित ने कहा कि इस बीमारी से पीड़ित लोगों को नजरअंदाज करने या कलंकित करने की बजाय उन्हें उचित समर्थन और इलाज देना जरूरी है। प्रसिद्ध शोधकर्ता ने बताया कि स्किजोफ्रेनिया रोग में ऐसी आवाजें सुनना या चीजें देखना जो वास्तव में नहीं होती, अकेले में बोलना, हंसना या इशारे करना, अजीब व्यवहार, बिना उद्देश्य भटकना, भावनाएं व्यक्त करने में कठिनाई, भावहीन चेहरा, रोजमर्रा की गतिविधियों में रुचि की कमी, ध्यान केंद्रित करने और याद रखने में परेशानी इसके लक्षण हैं। उन्होंने जनमानस से अपील की कि झाड़-फूंक से बचें और सही इलाज की ओर बढ़ें। मरीजों की बातों का विरोध या उपहास न करें, संयम रखें, मरीज को प्यार से दवा लेने और डॉक्टर से मिलने के लिए प्रेरित करें, जिसकी बात मरीज मानता है, उनसे मदद लें, दवा समय पर खिलाएं और नियमित जांच कराते रहें।कार्यक्रम में मनोरोग विशेषज्ञ, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, प्रशिक्षु डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे। सभी ने स्किजोफ्रेनिया के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को तोड़ने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की अपील की।