इमरान को एकांत कारावास में रखकर बनाया जा रहा है राजनीति छोड़ने का दबाव : उज़मा ख़ानम

इमरान को एकांत कारावास में रखकर बनाया जा रहा है राजनीति छोड़ने का दबाव : उज़मा ख़ानम

रावलपिंडी, 25 मई। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन उज़मा ख़ान ने दावा किया है कि उनके भाई को एकांत कारावास में रखकर राजनीति छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है और समुचित उपचार नहीं मिलने से उनकी एक आंख की रोशनी भी कम होती जा रही है।

श्रीमती खानम ने द टाइम्स को दिये गये एक साक्षात्कार में बताया कि वह छह महीने पहले अपने भाई से मिली थीं। उस समय उन्हें एकांत कारावास में चार माह का समय गुज़र गया था।

द टाइम्स की रिपोर्ट में श्रीमती खानम के हवाले से कहा गया, “पहले उनका मनोबल अच्छा था, लेकिन जब मैं उनसे आखिरी बार मिली, तब उन्हें चार सप्ताह से अधिक समय से एकांत कारावास में रखा गया था और वह बेहद परेशान थे। वह बताते कि किसी को उनसे बात करने की अनुमति नहीं है, यहां तक कि पहरेदारों को भी नहीं। वह बार-बार कहते रहे कि एकांत कारावास से बदतर कुछ नहीं हो सकता। अब इसे लगभग सात महीने हो चुके हैं।” वह बताती हैं कि श्री खान ने आखिरी मुलाकात में उनसे कहा था कि उन्हें ‘तोड़ने’ की कोशिश की जा रही है, लेकिन ‘वे सफल नहीं होंगे।’बहन उज़मा ने आशंका जतायी कि उनके भाई की आंखों की रोशनी जा रही है। उन्होंने कहा, “उनकी दाहिनी आंख से पानी निकल रहा था। मैंने पूछा कि क्या हुआ, लेकिन वह दूसरी बातों को लेकर इतने विचलित थे कि इस पर ज्यादा चर्चा नहीं हो सकी। फरवरी में जब उनके वकील ने उनसे मुलाकात की तो आंख से लगातार पानी बह रहा था और इमरान ने कहा कि उन्हें उससे कुछ दिखाई नहीं दे रहा। फिर अप्रैल में उन्होंने बताया कि एक सरकारी डॉक्टर ने कहा है कि आंख में खून का थक्का जम गया है और 85 प्रतिशत स्थायी दृष्टि हानि हो चुकी है।”उन्होंने कहा कि रोजाना दो घंटे के व्यायाम के अलावा किताबें पढ़ना ही 73 वर्षीय श्री खान को मानसिक रूप से संभाले हुए था। बहनों को जब उनसे मिलने की अनुमति मिलती थी, तब वे हर सप्ताह करीब एक दर्जन किताबें लेकर जाती थीं, लेकिन बाद में यह बंद कर दिया गया। अदालत जाने के बाद भी केवल पांच किताबों की अनुमति मिली, जिनमें से दो अस्वीकार कर दी गयीं। श्रीमती खानम ने कहा, “वे उन्हें तोड़कर समझौता करवाना चाहते हैं और शायद आंख का मामला भी उसी का हिस्सा है। किताबें ही उनके जीवित रहने का सहारा थीं और अब अगर वह पढ़ भी नहीं सकते और किसी से बात भी नहीं कर सकते…” उज़मा के अलावा अलीमा खानम, और नौरीन नियाज़ी भी दो बहनें हैं जो इमरान के साथ मानवीय व्यवहार के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटा रही हैं।इन बहनों ने मांग की है कि श्री खान को तत्काल उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। बहन अलीमा खान कहती हैं, “पूरा मामला बेहद संदिग्ध और गैरकानूनी है। हमें कोई जानकारी नहीं दी जा रही। संभव है उन्हें कोई ऐसा पदार्थ दिया गया हो जिससे (आंख में) खून का थक्का बना हो। हमारी सिर्फ इतनी मांग है कि उन्हें किसी अच्छे अस्पताल ले जाकर विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराई जाए।”श्रीमती अलीमा ने बताया कि 16 अक्टूबर के बाद से उन्हें अपने भाई से मिलने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि परिवार के छह सदस्यों में से एक को प्रत्येक मंगलवार को मुलाकात की अनुमति होगी और उनके छह वकीलों में से एक को भी इस तरह की अनुमति है। उन्होंने कहा कि अप्रैल के बाद से वकीलों को भी मिलने नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इमरान खान को प्रताड़ित किए जाने के पीछे हैं। उन्होंने कहा, “जनरल जिस चीज से डरते हैं, वह इमरान खान केदिये जाने वाले संदेश है। वह जो भी कहते हैं, पूरा देश सुनता है। उन्हें लगा था कि जेल में डालने के बाद लोग उन्हें भूल जाएंगे, लेकिन लोग उनका साथ नहीं छोड़ रहे। लोग अब इस दमनकारी व्यवस्था को नहीं चाहते।

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