उत्तर प्रदेश में बिजली संकट गहराया, पीक डिमांड 31,804 मेगावाट पहुंची

उत्तर प्रदेश में बिजली संकट गहराया, पीक डिमांड 31,804 मेगावाट पहुंची

लखनऊ, 26 मई । भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश में मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ती खाई के चलते बिजली संकट गहरा गया है। पीक आवर में मांग पूरी करने के लिए एनर्जी एक्सचेंज पर बिजली खरीद के लिए उपलब्ध ही नहीं है।यूपीपीसीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य बिजली निगम हर दिन शाम के पीक आवर में मांग-आपूर्ति का अंतर पाटने के लिए एक्सचेंज पर बोली लगा रहा है। लेकिन हाल के दिनों में एक यूनिट भी नहीं खरीद पाया है, क्योंकि बाजार में सरप्लस बिजली उपलब्ध ही नहीं है।

अधिकारी ने कहा कि यूपीपीसीएल पारंपरिक रूप से गर्मियों में पीक डिमांड को मैनेज करने के लिए एनर्जी एक्सचेंज पर निर्भर रहा है। लेकिन इस साल सभी राज्यों में एक साथ असाधारण रूप से अधिक मांग के कारण शॉर्ट-टर्म खरीद का यह जरिया बेअसर हो गया है।रविवार रात प्रदेश की बिजली मांग इस सीजन के सबसे ऊंचे स्तर 31,804 मेगावाट पर पहुंच गई। यह न केवल उप्र बल्कि देश में भी सबसे अधिक मांग में से एक है। तापमान अधिक रहने से आने वाले दिनों में मांग और बढ़ने की उम्मीद है।

अधिकारियों ने बताया कि दिन के समय सौर ऊर्जा से कुछ राहत मिल जाती है और आपूर्ति-मांग का अंतर कम हो जाता है। लेकिन बड़ी चुनौती रात में आती है, जब सौर बिजली उपलब्ध नहीं होती और मांग और बढ़ जाती है। सूत्रों के अनुसार एक्सचेंज पर जो भी सीमित बिजली उपलब्ध हो रही है, वह सीलिंग रेट 10 रुपये प्रति यूनिट पर बिक रही है। इससे मांग के भारी दबाव का पता चलता है। हर राज्य को अभी बिजली चाहिए, इसलिए एक्सचेंज पर बेचने के लिए किसी के पास सरप्लस नहीं है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि जितनी जरूरत हो उतनी बिजली खरीदी जाए। उन्होंने कहा कि आपूर्ति सुनिश्चित करने में वित्तीय बाधा नहीं आनी चाहिए। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अब चुनौती पैसे की नहीं, उपलब्धता की है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों के साथ बैंकिंग सिस्टम के तहत द्विपक्षीय व्यवस्था एक बड़ा सहारा बनी है। इसके तहत राज्य एक-दूसरे को बिजली देते हैं और बाद में हिसाब बराबर करते हैं।

पीक डेफिसिट 2,000 मेगावाट से अधिक होने के बावजूद अधिकारियों का दावा है कि कोई अतिरिक्त लोड शेडिंग नहीं की जा रही है। लोड के पुनर्वितरण से आपूर्ति प्रबंधित की जा रही है।यूपीपीसीएल के एमडी नितीश कुमार ने कहा कि यह सच है कि एक्सचेंज पर खरीद के लिए बिजली उपलब्ध नहीं है, क्योंकि इस साल पूरा देश ऐतिहासिक मांग का सामना कर रहा है। स्थिति मानसून आने तक कठिन रहने की आशंका है। कई हिस्सों में मानसून आने से कूलिंग डिमांड घट सकती है और बिजली बाजार पर दबाव कम हो सकता है।

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