बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन समिति में गोस्वामी समाज के प्रतिनिधि हो सकेंगे शामिल

बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन समिति में गोस्वामी समाज के प्रतिनिधि हो सकेंगे शामिल

मथुरा, 26 मई । वृंदावन स्थित प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन, पारंपरिक व्यवस्था और श्रद्धालुओं की भीड़ नियंत्रण से जुड़े मामले में उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। अदालत ने मंदिर की धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए गोस्वामी समाज के प्रतिनिधियों को मंदिर प्रबंधन समिति में शामिल करने की अनुमति दे दी है।न्यायालय ने आदेश दिया कि शयन भोग और राजभोग दोनों गोस्वामी समूहों से दो-दो प्रतिनिधियों को मंदिर प्रबंधन से जुड़ी हाई पावर्ड कमेटी में शामिल किया जाएगा। कोर्ट के निर्देशानुसार शयन भोग समूह से रजत गोस्वामी और शैलेंद्र गोस्वामी, जबकि राजभोग समूह से गोपेश गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी समिति का हिस्सा होंगे।

ये सभी सदस्य मंदिर की पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था, पूजा पद्धति और दैनिक संचालन को लेकर अपने सुझाव हाई पावर्ड कमेटी को देंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि समिति इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी। साथ ही मंदिर के खुलने और बंद होने के समय को लेकर भी सुझाव दिए जा सकेंगे।सुप्रीम कोर्ट ने श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को बांके बिहारी मंदिर के आसपास के पूरे क्षेत्र का विस्तृत विकास प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा कि मंदिर तक पहुंचने वाली सड़कों को चौड़ा किया जाए तथा रास्तों पर होने वाले अतिक्रमण और अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों को नियंत्रित किया जाए। इसके अलावा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक और बेहतर सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर प्रबंधन समिति दोनों को निर्देश दिया है कि मंदिर प्रबंधन में सुधार और क्षेत्रीय विकास कार्यों को लेकर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तैयार कर अदालत में पेश की जाए। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बांके बिहारी मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भविष्य में बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम हो सकेगी।

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