
लखनऊ, 27 मई । उत्तर प्रदेश में स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति की प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में आगे बढ गई है । सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने नई दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के अधिकारियों के साथ बैठक कर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के पैनल को अंतिम रूप देने पर चर्चा की।सूत्रों के अनुसार बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल और अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद शामिल हुए।
यूपीएससी के साथ वरिष्ठता और पात्रता मानदंड के आधार पर तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों के पैनल को अंतिम करने पर विचार हुआ। यूपीएससी जल्द ही यह पैनल राज्य सरकार को भेजेगा।पैनल मिलने के बाद राज्य सरकार शॉर्टलिस्टेड अधिकारियों की सतर्कता जांच रिपोर्ट लेगी और फिर अंतिम चयन प्रक्रिया शुरू करेगी। नियुक्ति का अंतिम फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। इस समय डीजीपी पद की दौड़ में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों में रेणुका मिश्रा, पीयूष आनंद और कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्णा का नाम प्रमुख है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक राजीव कृष्णा फ्रंटरनर माने जा रहे हैं और उनके स्थायी डीजीपी बनने की संभावना सबसे अधिक है।
राजीव कृष्णा 31 मई 2024 को पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद से कार्यवाहक डीजीपी का पदभार संभाल रहे हैं। वे वर्तमान में विजिलेंस के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी देख रहे हैं। पूर्व डीजीपी मुकुल गोयल को हटाए जाने के बाद से उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक कार्यवाहक पुलिस प्रमुखों के साथ काम चल रहा था। स्थायी डीजीपी न होने की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी।शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि वे यूपीएससी के पैनल के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमित पुलिस प्रमुख की नियुक्ति करें। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया के तहत यूपीएससी पात्र वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल तैयार करता है। राज्य सरकार उसमें से उपयुक्तता और प्रशासनिक आकलन के आधार पर एक अधिकारी का चयन कर डीजीपी नियुक्त करती है।