
कानपुर, 27 मई। उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए अब उन्हें मोती की व्यावसायिक खेती यानी पर्ल फार्मिंग से जोड़ रही है। इसी क्रम में कानपुर जिले में पहले चरण के तहत 15 खेत तालाबों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के अंतर्गत किसानों को तकनीकी सहायता के साथ सरकारी अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा।योजना की खास बात यह है कि किसानों को सीप पालन की तकनीकी प्रक्रिया को लेकर परेशान नहीं होना पड़ेगा। सीप उपलब्ध कराने से लेकर उनकी सर्जरी और न्यूक्लियस डालने तक का पूरा कार्य सरकारी विशेषज्ञों की निगरानी में कराया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार यदि किसान के पास 440 वर्ग मीटर का खेत तालाब है, जिसमें वर्षभर कम से कम डेढ़ मीटर पानी रहता हो, तो वह इस योजना का लाभ उठा सकता है। ऐसे एक तालाब में लगभग दो हजार सीप डाले जाएंगे। सीप खरीद, सर्जरी, चारा और ऑक्सीजन सेट समेत कुल लागत लगभग डेढ़ लाख रुपये आएगी, जिस पर सरकार 40 प्रतिशत तक अनुदान देगी। प्राथमिकता श्रेणी के कुछ लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ भी मिल सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 60 प्रतिशत सीप भी सुरक्षित रहते हैं तो करीब 2400 मोती तैयार हो सकते हैं। बाजार में एक मोती की न्यूनतम कीमत लगभग 100 रुपये मानी जाती है। इस हिसाब से किसान को लगभग दो लाख 40 हजार रुपये की आय हो सकती है और खर्च निकालने के बाद करीब 90 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त होगा।
सरकार खेत तालाब निर्माण और सिंचाई उपकरणों पर भी सहायता दे रही है। नया तालाब खुदवाने पर लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 52,500 रुपये तक अनुदान दिया जाएगा। वहीं पंपिंगसेट खरीदने पर मशीन की कीमत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 15 हजार रुपये तक की सहायता मिलेगी।अधिकारियों ने बताया कि मोती की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए तालाब में महुआ की खली, चूना अथवा किसी भी प्रकार के घातक रसायन और कीटनाशकों के प्रयोग पर रोक रहेगी। इससे किसान उसी तालाब में रसायनमुक्त मछली पालन भी कर सकेंगे और अतिरिक्त आय अर्जित कर पाएंगे।
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया उत्तर प्रदेश कृषि विभाग पोर्टल पर उपलब्ध है। यदि निर्धारित लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं तो लाभार्थियों का चयन पारदर्शी ऑनलाइन ई-लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा।भूमि संरक्षण अधिकारी आर.पी. कुशवाहा ने बताया कि योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की अनुपयोगी भूमि का बेहतर उपयोग कर किसानों की आय में वृद्धि करना है। उन्होंने इच्छुक किसानों से समय रहते पोर्टल पर आवेदन करने की अपील की।