
वाशिंगटन, 27 मई । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही वार्ता के बीच बुधवार को अपने मंत्रिमंडल के साथ बैठक करने जा रहे हैं।
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार यह बैठक अमेरिकी प्रशासन के लिए बेहद संवेदनशील समय पर हो रही है। इस समय श्री ट्रम्प कूटनीति और सैन्य दबाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर उन्हें देश के भीतर बढ़ते जन-आक्रोश का भी सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इस संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और आगामी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले मतदाता काफी परेशान हैं।
अभी कुछ ही दिन पहले श्री ट्रम्प ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अप्रैल में घोषित संघर्षविराम को आगे बढ़ाने के लिए एक रूपरेखा पर ‘काफी हद तक बातचीत’ कर ली है। हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य और उसके समृद्ध यूरेनियम के भंडार के प्रबंधन सहित कई बड़े मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं, जो किसी भी शांति समझौते की राह में बाधा बने हुए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति जहां सार्वजनिक रूप से भरोसा जता रहे हैं, वहीं बातचीत से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वार्ता अभी भी अस्थिर है और यह किसी भी समय विफल हो सकती है।
ट्रम्प प्रशासन एक ऐसे सम्मानजनक समझौते की उम्मीद कर रहा है जिससे अमेरिका यह दावा कर सके कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताएं इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि वह इसे अपनी रणनीतिक जीत मानकर युद्ध से पीछे हट सके। गौरतलब है कि यह युद्ध लगातार अमेरिकी प्रशासन की उम्मीदों के विपरीत दिशा में जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, श्री ट्रम्प के समर्थकों सहित दोनों दलों के आलोचकों ने व्हाइट हाउस पर एक ऐसे समझौते की ओर बढ़ने का आरोप लगाया है, जिससे ईरान का नेतृत्व कमजोर तो होगा लेकिन वह सत्ता में बना रहेगा।
खबरों के मुताबिक, इस उभरती हुई रूपरेखा का एक बड़ा हिस्सा सबसे विवादित सवालों को भविष्य की वार्ताओं के लिए टाल देता है। वर्तमान में पूरा ध्यान होर्मुज को फिर से खोलने, समुद्री तनाव को कम करने और संघर्षविराम को इतना बढ़ाने पर केंद्रित है जिससे आगे की विस्तृत बातचीत जारी रखी जा सके।
हालांकि, सोमवार को अमेरिकी बलों द्वारा दक्षिणी ईरान में मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों और बारूदी सुरंग बिछाने वाली नौकाओं पर किए गए हमलों के बाद इस कूटनीतिक प्रयास को एक और झटका लगा है। यद्धपि अमेरिका ने इन हमलों को ‘रक्षात्मक’ बताया है।
अमेरिका ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह आत्मसंयम के साथ की गई थी और संघर्षविराम की अवधि के दौरान समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक थी। वहीं ईरान ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अमेरिका के ‘दुर्भावना और अविश्वसनीयता’ का सबूत बताया है।
मंगलवार को बात करते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्वीकार किया कि यह बातचीत अभी कुछ और दिनों तक चलने की संभावना है। होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और संघर्षविराम को बढ़ाने पर जारी चर्चा के बीच उन्होंन श्री ट्रम्प के संदर्भ में कहा, “वह या तो एक अच्छा सौदा करेंगे या फिर कोई सौदा नहीं करेंगे।”