
वॉशिंगटन, 11 जुलाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी गुटों से जान से मारे जाने की मिल रही लगातार धमकियां के बीच कहा है कि “1,000 मिसाइलें हमले के लिए पूरी तरह तैयारहैं” और अगर ऐसी कोई साजिश रची गई तो इसका करारा जवाब दिया जाएगा। ईरान को शनिवार को यह चेतावनी तब दी गई जब खुफिया जानकारी से पता चला कि कुछ ईरानी गुट इस तरह की योजना बना रहे हैं।यह चेतावनी ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद बढ़े तनाव के बीच आई है। अंतिम संस्कार के दौरान शोक मनाने वालों ने खुलेआम ऐसे पोस्टर और बैनर दिखाए जिनमें श्री ट्रंप और इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को जान से मारने की बात कही गई थी। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान पर अमेरिका के नेतृत्व वाले हमले के पहले दिन (28 फरवरी) मारे गए थे, जिसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने देश का नेतृत्व संभाला था।इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा की नाजुक स्थिति को और उजागर कर दिया है, क्योंकि क्षेत्र में स्थिरता लाने की कोशिशों को बार-बार झटके लग रहे हैं। श्री ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि अगर ईरानी नेतृत्व ने उनकी हत्या करने की कोशिश की, तो अमेरिका ज़बरदस्त सैन्य कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
श्री ट्रंप ने लिखा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान पर एक हज़ार मिसाइलें निशाना साधकर तैयार रखी गई हैं और अगर ईरानी सरकार अपनी धमकी पर अमल करती है, तो तुरंत हज़ारों और मिसाइलें दागी जाएंगी।”
उन्होंने आगे चेतावनी दी कि अगर उनकी जान लेने की कोई भी कोशिश की गई, तो अमेरिका ईरान के सभी इलाकों को पूरी तरह तबाह और बर्बाद करने के लिए “तैयार और सक्षम” है और यह कार्रवाई एक साल तक चलेगी, जिसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। श्री ट्रंप ने अपनी पोस्ट के आखिर में यह भी लिखा कि अमेरिकी सेना “ईरान के सभी इलाकों को पूरी तरह तबाह और बर्बाद कर देगीईरान के साथ तनाव और उसके बाद हुए युद्धविराम के दौरान श्री ट्रंप ने तेहरान के ख़िलाफ़ कड़ी सैन्य कार्रवाई की धमकी देते हुए कई बार अपने सार्वजनिक बयानों में ईश्वर के लिए अरबी शब्द का इस्तेमाल किया है।तुर्की से निकलने से पहले श्री ट्रंप ने माना कि उन्हें लगता है कि वे अभी भी निशाने पर हैं। हाल ही में इज़रायली खुफिया विभाग ने ट्रंप प्रशासन के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या की कथित ईरानी धमकियों के बारे में जानकारी साझा की। हालांकि, खुफिया जानकारी के आकलन से वाकिफ दो अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि हत्या की किसी नई या आसन्न साजिश का कोई सबूत नहीं मिला। इसके बजाय इन आकलनों में अलग-अलग ईरानी लोगों के बीच लगातार हो रही ऐसी बातचीत का पता चला, जिनमें श्री ट्रंप को निशाना बनाने की इच्छा जताई गई थी।
सबसे पहले ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने खबर दी थी कि इज़रायल ने हत्या की कथित ईरानी साजिश के बारे में खुफिया जानकारी साझा की है। बाद में सीएनएन ने खबर दी कि हाल अमेरिकी खुफिया विभाग ने ईरानी कट्टरपंथियों के बीच लगातार शत्रुतापूर्ण बयानबाजी देखी थी, लेकिन अधिकारियों को किसी खास कार्यात्मक योजना का कोई सबूत नहीं मिला।
कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी कि हो सकता है कि इस खुफिया जानकारी का मकसद अमेरिका और ईरान के बीच मतभेदों को और बढ़ाना हो, जबकि संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत जारी है।
श्री ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम प्रभावी रूप से “समाप्त” हो गया है, हालांकि उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनयिक वार्ता जारी रहेगी। सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि इन धमकियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।श्री ट्रंप और ईरान के बीच शत्रुता 2020 से चली आ रही है, जब उन्होंने अमेरिकी ड्रोन हमले का आदेश दिया था जिसमें ईरानी मेजर जनरल कासिम सुलेमानी मारे गए थे और जिसके बाद ईरान के नेतृत्व ने बदला लेने की कसम खाई थी।