
ईरान, 11 जुलाई । ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता आयतुल्लाह अली खामेनेई और हालिया दो युद्धों में मारे गये अन्य लोगों की हत्या का बदला लेने का संकल्प लिया है।श्री खामेनेई ने शनिवार को जारी संदेश में कहा, “हम अपराधी और कलंकित हत्यारों से आपके पवित्र खून और इन दो युद्धों के सभी शहीदों के खून का बदला लेने की शपथ लेते हैं। यह बदला हमारे राष्ट्र की मांग है और यह हर हाल में होकर रहेगा।”उन्होंने कहा कि वह या अन्य अधिकारी पद पर रहें या न रहें, बदला जरूर लिया जायेगा।उन्होंने कहा, “इसके जिम्मेदार लोग चैन से बिस्तर पर मरने की उम्मीद अपने साथ कब्र में लेकर जायेंगे।” उन्होंने कहा कि यह जवाबी कार्रवाई उनके या किसी अन्य अधिकारी की मौजूदगी पर निर्भर नहीं करती। उन्होंने कहा, “हम यहां रहें या न रहें, यह मकसद पूरा होकर रहेगा। दुनिया भर के आजादी-पसंद लोग जल्द ही इस ईश्वरीय मिशन का अपना-अपना हिस्सा पूरा करेंगे।”
नौ जुलाई की तारीख वाला यह संदेश शनिवार को सरकारी मीडिया के जरिये जारी किया गया है। गौरतलब है कि नौ जुलाई को ही मशहद में अली खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया गया था।
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस चेतावनी के कुछ ही घंटों बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि ईरान ने उनकी हत्या की कोशिश की तो अमेरिका उसे ‘तबाह’ कर देगा। पिता के निधन के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता चुने जाने के बाद से श्री खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आये हैं। उन्होंने ईरान और इराक के शहरों और गांवों विशेषकर तेहरान, गम, नजफ, करबला और मशहद में करोड़ों लोगों की मौजूदगी की दिल से सराहना की। उन्होंने इस जनसैलाब को ‘अद्भुत, दुश्मन का हौसला तोड़ने वाला और ऐतिहासिक’ बताया।श्री मोजतबा खामेनेई ने दिवंगत अली खामेनेई को सीधे संबोधित करते हुए कहा, “नम आंखों और टूटे दिल के साथ आपको विदा करते हुए हम आपकी विचारधारा को बनाये रखने का संकल्प लेते हैं। हम किसी कठिनाई से डरे बिना और ईश्वर के वादों पर भरोसा रखते हुए आपके बताये रास्ते पर दृढ़ता से चलेंगे।”
ईरान और इराक के कई शहरों में एक हफ्ते तक चले अंतिम संस्कार के जुलूसों के बाद, ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को देश की सबसे पवित्र शिया दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।मध्य तेहरान में उनके परिसर पर अमेरिकी-इजरायली हमले में मारे जाने के चार महीने से अधिक समय बाद उन्हें दफनाया गया है। उन्हें उनके जन्म स्थान मशहद में इमाम रजा की दरगाह में दफनाया गया है। शहर के बीचों-बीच स्थित यह विशाल धार्मिक परिसर अपने बड़े सुनहरे गुंबद और मीनारों के लिए जाना जाता है।