टाटा पावर ने उप्र में तय किया तीन लाख रूफटॉप इंस्टॉलेशन का लक्ष्य

टाटा पावर ने उप्र में तय किया तीन लाख रूफटॉप इंस्टॉलेशन का लक्ष्य

लखनऊ, 29 मई। टाटा पॉवर रिन्यूअल एनर्जी लिमिटेड की सहायक कंपनी टाटा पॉवर सोलर रुफटॉप ने उत्तर प्रदेश को सोलर ऊर्जा हब बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शुक्रवार को लखनऊ में अपने प्रमुख ‘घर-घर सोलर’ अभियान तथा बैटरी ऊर्जा भंडारण समाधान (बीईएसएस) का शुभारंभ किया।कंपनी ने अगले तीन वर्षों में प्रदेशभर में तीन लाख रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन कर 1000 मेगावाट पीक की संचयी क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी के अनुसार यह पहल उत्तर प्रदेश के शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने तथा चौबीसों घंटे स्वच्छ एवं भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके तहत उपभोक्ताओं को शून्य डाउन पेमेंट और मात्र 697 रुपये मासिक ईएमआई से शुरू होने वाली विशेष फाइनेंसिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

कंपनी ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और राज्य सरकार की सब्सिडी के संयुक्त लाभ से तीन किलोवाट तक के सोलर सिस्टम पर 1.08 लाख रुपये तक की सब्सिडी उपलब्ध है, जिससे उत्तर प्रदेश देश के सबसे आकर्षक रूफटॉप सोलर बाजारों में शामिल हो गया है।अभियान के तहत एक किलोवाट से 10 किलोवाट तक के सोलर समाधान उपलब्ध कराए जाएंगे। सब्सिडी के बाद एक किलोवाट सिस्टम की ईएमआई 697 रुपये, दो किलोवाट की 1383 रुपये, तीन किलोवाट की 2633 रुपये, पांच किलोवाट की 5794 रुपये तथा 10 किलोवाट सिस्टम की 10901 रुपये प्रतिमाह निर्धारित की गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के प्रसार के लिए कंपनी ने ‘मेरा गांव, मेरा सोलर’ पहल शुरू की है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं ताकि दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों तक भी रूफटॉप सोलर की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।टाटा पॉवर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक डॉ. प्रवीर सिन्हा ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे रूफटॉप सोलर बाजारों में शामिल हो चुका है और कंपनी राज्य में स्वच्छ ऊर्जा को सुलभ एवं किफायती बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कंपनी के अनुसार उत्तर प्रदेश में अब तक 77,068 इंस्टॉलेशन के माध्यम से 375 मेगावाट पीक क्षमता स्थापित की जा चुकी है, जबकि लखनऊ में 18,743 इंस्टॉलेशन पूरे किए गए हैं। इससे प्रतिवर्ष लगभग 4.5 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिल रही है।

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