
हमीरपुर, 29 मई । उत्तर प्रदेश में हमीरपुर जिले के ललपुरा क्षेत्र में निर्माणाधीन पुल की कोठी और शटरिंग ढहने से छह मजदूरों की मौत हो गई, जबकि तीन मजदूरों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बचा लिया गया। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब मौसम विभाग द्वारा दो दिनों से तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया जा रहा था, तब भी मजदूरों से रात में काम क्यों कराया गया। पुलिस के अनुसार ललपुरा थाना क्षेत्र के मोराकांदर गांव में लगभग 92 करोड़ रुपये की लागत से ‘ग्यारह कोठी’ पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। शुक्रवार तड़के पुल की एक कोठी के लिए शटरिंग का कार्य किया जा रहा था। इसी दौरान तेज आंधी आने पर वहां मौजूद मजदूर पास खड़ी हाइड्रा मशीन में जाकर बैठ गए। तभी निर्माणाधीन कोठी और शटरिंग भरभराकर गिर गई, जिससे हाइड्रा के भीतर बैठे मजदूर मलबे में दब गए।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। हादसे में राजेश पाल (50) निवासी अछपुरा थाना ललपुरा, पुष्पेंद्र सिंह (43) निवासी स्वासा खुर्द थाना ललपुरा, लोकेन्द्र (22), कुलदीप निषाद (19) निवासी चिल्ला जनपद बांदा, सभाजीत (21) तथा गंगाचरण उर्फ सावंत (28) निवासी भूरागढ़ थाना बांदा की मौत हो गई।
घटना में तीन अन्य मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद परिजनों को सौंप दिया।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत करते हुए कहा कि पिछले दो दिनों से तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी था, ऐसे में सेतु निगम को रात में मजदूरों से काम नहीं कराना चाहिए था। उनका आरोप है कि मौसम चेतावनी के बावजूद निर्माण कार्य जारी रखना लापरवाही को दर्शाता है।उधर सेतु निगम के परियोजना अधिकारी दिलीप कुमार ने कहा कि तेज आंधी के झोंकों के कारण निर्माणाधीन कोठी गिर गई। हालांकि स्थानीय लोग इस तर्क पर सवाल उठा रहे हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी अभिषेक कुमार और पुलिस अधीक्षक मृगेंद्र शेखर पाठक मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों से जानकारी ली। प्रशासन द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है।