
अमरोहा, 29 मई। उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे पर अधूरी सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच सफर करना यात्रियों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है। अमरोहा से गुजरने वाले इस डिजिटल एक्सप्रेसवे पर आए दिन हो रहे हादसों ने सुरक्षा दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।एक्सप्रेसवे पर सबसे बड़ी समस्या जंगली और आवारा पशुओं, विशेषकर नीलगायों की आवाजाही बन गई है। पशुओं को रोकने के लिए लगाई गई सुरक्षा जालियां पर्याप्त ऊंची नहीं हैं, जिससे नीलगाय आसानी से सड़क तक पहुंच जा रही हैं। 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहे वाहनों के सामने अचानक पशु आने से गंभीर हादसों का खतरा बढ़ गया है। हालांकि डिजिटल स्क्रीन पर सावधानी संबंधी संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं, लेकिन प्रभावी रोकथाम के इंतजाम अभी अधूरे हैं।
रात के समय प्रकाश व्यवस्था की कमी भी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रही है। एक्सप्रेसवे के कई हिस्से अंधेरे में डूबे रहते हैं, जिससे सड़क पर खड़े वाहन या अन्य बाधाएं समय रहते दिखाई नहीं देतीं। वहीं, कई चालक मोबाइल पर बात करने, आराम करने या फोटो खींचने के लिए नॉन-पार्किंग जोन में वाहन खड़े कर देते हैं, जो तेज रफ्तार यातायात के बीच जानलेवा साबित हो रहा है।यात्रियों ने आरोप लगाया कि खराब वाहनों को हटाने के लिए क्रेन और रिकवरी वाहनों की उपलब्धता भी पर्याप्त नहीं है। कई बार खराब वाहन घंटों तक सड़क किनारे खड़े रहते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। यात्रियों का कहना है कि तेज रफ्तार की अनुमति देने से पहले पर्याप्त रोशनी, निगरानी व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह दुरुस्त किया जाना चाहिए था।
उधर, गंगा एक्सप्रेसवे सुरक्षा एवं संचालन के सीजीएम अनूप सिंह ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप हैं और प्रारंभिक चरण में कुछ हादसे होना सामान्य बात है। उन्होंने बताया कि प्रकाश व्यवस्था का कार्य तेजी से कराया जा रहा है तथा अवैध पार्किंग रोकने के लिए रिस्पांस टीमें सक्रिय हैं। साथ ही दुर्घटना या वाहन खराब होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।