
बर्लिन, 29 मई। हर साल, यूरोपीय देश 3.3 अरब लीटर से अधिक आइसक्रीम का उत्पादन करते हैं और इस दौड़ में सबसे बड़े उत्पादक के रूप में जर्मनी सबसे आगे है।दिलचस्प बात यह है कि यूरोस्टेट और उद्योग की रिपोर्टों के आंकड़ों से पता चलता है कि आइसक्रीम के सबसे बड़े उपभोक्ता भूमध्यसागरीय (मेडिटेरेनियन) क्षेत्रों में नहीं, बल्कि उत्तरी और पूर्वी यूरोप के उन देशों में है, जहां कड़ाके की ठंड पड़ती है। यही वजह है कि पोलैंड प्रति व्यक्ति सालाना 16 किलोग्राम की आश्चर्यजनक खपत के साथ सबसे आगे है।
स्वीडन और फिनलैंड के निवासी भी पोलैंड से ज्यादा पीछे नहीं हैं, जो सालाना 11 से 14 लीटर के बीच आइसक्रीम खाते हैं, जबकि जर्मनी में एक औसत व्यक्ति हर साल लगभग आठ लीटर आइसक्रीम खा जाता है। मोटे तौर पर इसका अर्थ यह हुआ कि 115 से 160 स्कूप। जब खाने की आदतों की बात आती है तो जर्मन लोग घर पर आइसक्रीम खाना पसंद करते हैं, जो महीने में औसतन पांच बार होता है, जबकि इटली और स्पेन के लोग का झुकाव बाहर जाकर जेलाटेरिया और पार्लरों में आइसक्रीम खाने में दिखता हैं। यूरोपियन आइसक्रीम एसोसिएशन के अनुसार, क्लासिक वनिला पूरे यूरोप में निर्विवाद रूप से सबसे पसंदीदा फ्लेवर बना हुआ है। इसके बाद चॉकलेट और स्ट्राचियाटेला (पारंपरिक इटैलियन चॉकलेट चिप) का नंबर आता है।’दुबई चॉकलेट’ जैसे सोशल मीडिया क्रेज के कारण वर्तमान रुझान बदल रहे हैं, जिससे पूरे महाद्वीप में पिस्ता और अन्य नट्स-आधारित फ्लेवर्स की लोकप्रियता में भारी उछाल आया है।इन महाद्वीपीय पसंदीदा फ्लेवर्स के साथ-साथ, अलग-अलग क्षेत्रीय प्राथमिकताएं भी बनी हुई हैं जैसे डेनमार्क में लिकोरिस फ्लेवर और आइसलैंड में कॉफी-युक्त आइसक्रीम के लिए एक मजबूत पसंद देखी जाती है।