झांसी की ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल सिटी परियोजना को मिली पर्यावरणीय स्वीकृति

झांसी की ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल सिटी परियोजना को मिली पर्यावरणीय स्वीकृति

लखनऊ/झांसी, 01 जून। उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड क्षेत्र के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास को नई गति देते हुए केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने झांसी स्थित बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) की ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल सिटी (बीडा मास्टर प्लान-2045) परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान कर दी है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी इस परियोजना में लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। परियोजना 253.33 वर्ग किलोमीटर (62,599.20 एकड़) क्षेत्र में विकसित की जाएगी, जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र के औद्योगिक परिदृश्य में व्यापक बदलाव आने की उम्मीद है। परियोजना से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 5.6 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने का अनुमान है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार झांसी तहसील के 33 गांवों को शामिल करते हुए विकसित की जाने वाली इस परियोजना के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना-2006 के तहत निर्धारित सभी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने विभिन्न चरणों में परियोजना की समीक्षा की तथा स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दिसंबर 2025 में जनसुनवाई भी आयोजित की गई, जिसमें परियोजना को व्यापक समर्थन मिला।संशोधित मास्टर प्लान के अनुसार कुल क्षेत्रफल का 33.02 प्रतिशत भाग औद्योगिक विकास के लिए आरक्षित किया गया है, जहां कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर तथा इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा 16.90 प्रतिशत क्षेत्र आवासीय विकास के लिए तथा लगभग 25 प्रतिशत क्षेत्र हरित एवं मनोरंजक गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखा गया है।

परियोजना के तहत सड़क, रेल और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के विकास के लिए 11.56 प्रतिशत क्षेत्र निर्धारित किया गया है। साथ ही व्यावसायिक, मिश्रित उपयोग एवं सार्वजनिक संस्थानों के लिए भी भूमि आरक्षित की गई है। पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए परियोजना क्षेत्र की सीमा पर 50 मीटर तथा डोंगरी बांध के आसपास 150 मीटर चौड़ा हरित बफर जोन विकसित किया जाएगा। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत व्यापक वृक्षारोपण भी किया जाएगा।बीडा प्रशासन ने शून्य तरल विसर्जन (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) की नीति अपनाई है। परियोजना के तहत 163.26 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 150.88 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा। उपचारित जल का पुनः उपयोग किया जाएगा तथा किसी भी प्रकार का अपशिष्ट जल बेतवा, पहुज और अंगौरी नदियों में नहीं छोड़ा जाएगा।

बीडा द्वारा अब तक 25,706 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। प्रभावित भूमि स्वामियों को अधिनियम-2013 के प्रावधानों के अनुसार पारदर्शी तरीके से मुआवजा दिया जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय ग्रामीण आबादी को आधुनिक शहरी सुविधाओं से जोड़ने के लिए पार्क, स्वास्थ्य केंद्र, शैक्षणिक संस्थान और कौशल विकास केंद्र विकसित किए जाएंगे।बीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) संजय कुमार खत्री ने कहा कि पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त होना बुंदेलखंड के विकास इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप बीडा को देश की आधुनिक, सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा, जो बुंदेलखंड को वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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