
नयी दिल्ली, 01 जून । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रियल एस्टेट व्यापारी विक्रम वाधवा को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले से जुड़ी जांच के संबंध में गिरफ्तार किया है।ईडी ने सोमवार को बताया कि वाधवा को 29 मई को गिरफ्तार कर एक विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष पेश किया गया था। अदालत ने वाधवा को चार दिन की ईडी रिमांड पर भेजा है।
ईडी ने इससे पहले इसी मामले में रिभव ऋषि और अभय कुमार को गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपियों को उस समय न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।ईडी के अनुसार, जांच में अब तक सामने आया है कि आरोपियों ने आईडीएफसी बैंक में मौजूद हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन और दो निजी विद्यालयों के खातों से 645 करोड़ रुपए का कथित रूप से गबन किया है।
ईडी ने बताया कि वाधवा मामले के मुख्य आरोपियों में से एक है और उसने कथित रूप से ऋषि, अभय कुमार, बैंक अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी रकम का गबन किया। ईडी ने आरोप लगाया है कि वाधवा ने अपराध से प्राप्त आय के सृजन और छिपाव में अहम भूमिका निभाई। जांचकर्ताओं के अनुसार, उसके अपने बैंक खाते में 70 करोड़ रुपए से ज्यादा रकम आयी। इसके अलावा उसे गबन से भी बड़ी मात्रा में कैश मिला।ईडी ने दावा किया कि वाधवा ने इस रकम से कई अचल संपत्तियां खरीदीं। जांच से पता चला है कि कैपको फिनटेक सर्विसेज, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, आरएस ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरूज़ प्राइवेट लिमिटेड सहित कई बिचौलिया शेल संस्थाओं ने कथित तौर पर विभिन्न सरकारी विभागों के खातों से सीधे गबन की गयी धनराशि प्राप्त की। इसके बाद इन हेराफेरी किये गये पैसों को आरोपियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के कई बैंक खातों के ज़रिए घुमाया गया। ईडी के मुताबिक, इन शेल कंपनियों से सैकड़ों करोड़ रुपये अलग-अलग जौहरियों को ट्रांसफर किये गये, जिन्होंने कथित तौर पर इन बैंकिंग लेन-देन के बदले नकद पैसे दिये।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि ऋषि और उसके साथियों ने इसके बाद वह नकद रकम अलग-अलग सरकारी अधिकारियों और कारोबारियों के बीच बांट दी। ईडी ने बताया कि पैसे के पूरे लेन-देन का पता लगाने, बाकी लाभार्थियों की पहचान करने, तथा अपराध से कथित तौर पर कमाये गये पैसों से खरीदी गयी संपत्तियों का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं। इस मामले में आगे की जांच चल रही है।