सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त हुए पांच न्यायाधीश मंगलवार को लेंगे शपथ

सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त हुए पांच न्यायाधीश मंगलवार को लेंगे शपथ

नयी दिल्ली, 01 जून । उच्चतम न्यायालय में सोमवार को नियुक्त किये गये पांच नये न्यायाधीश मंगलवार को शपथ ग्रहण करेंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत उन्हें शीर्ष न्यायालय के ऑडिटोरियम में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।

विधि एवं न्याय मंत्रालय के तहत न्याय विभाग की ओर से आज जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किया गया है।

केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने न्यायाधीशों की नियुक्ति की जानकारी साझा करते हुए बताया कि शपथ ग्रहण समारोह का कल पूर्वाह्न 10:30 बजे सीधा प्रसारण किया जाएगा।

इन पांच न्यायाधीशों के शपथ लेने के साथ ही शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी, जो इसकी स्वीकृत क्षमता 38 से केवल एक कम है। पिछले महीने ही एक अध्यादेश के जरिए अदालत में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की गयी थी। मौजूदा कमी के अलावा, इस महीने 16 जून को न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और 28 जून को न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी की सेवानिवृत्ति के बाद दो और पद खाली हो जाएंगे।

वरिष्ठता के क्रम में शपथ लेने वाले पांच न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति शील नागू सबसे वरिष्ठ हैं। उच्चतम न्यायालय के लिए सिफारिश किये जाने के समय वह पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय उनका मूल उच्च न्यायालय है, जहाँ उन्होंने अक्टूबर 1987 में एक अधिवक्ता के रूप में करियर शुरू किया था। वह मई 2011 में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश और मई 2013 में स्थायी न्यायाधीश बने थे। वह जुलाई 2024 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए थे। न्यायमूर्ति नागू 31 दिसंबर 2029 को उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त होंगे।

न्यायमूर्ति चंद्रशेखर अपनी पदोन्नति से पहले बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। दिल्ली विश्वविद्यालय के कानून स्नातक न्यायमूर्ति चंद्रशेखर 1993 में दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकृत हुए थे। जनवरी 2013 में उन्हें झारखंड उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और जून 2014 में वह स्थायी न्यायाधीश बने थे। बाद में उन्हें राजस्थान उच्च न्यायालय स्थानांतरित किया गया था और सितंबर 2025 में वह बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने। उनकी इस पदोन्नति से अब उच्चतम न्यायालय में झारखंड को प्रतिनिधित्व मिलेगा। वह 24 मई 2030 को सेवानिवृत्त होंगे।

न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा इससे पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 1995 में शीर्ष न्यायालय में ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ के रूप में योग्य घोषित हुए और 2011 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया था। अप्रैल 2013 में उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और मार्च 2015 में वह स्थायी न्यायाधीश बने। साल 2024 में उनका स्थानांतरण मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में हुआ और जुलाई 2025 में उन्होंने वहां के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल करीब साढ़े तीन साल का होगा।

न्यायमूर्ति अरुण पल्ली उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत होने से पहले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवा दे रहे थे। वह दिसंबर 2013 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त हुए थे और बाद में अप्रैल 2025 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। वर्ष 1988 में पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री लेने वाले न्यायमूर्ति पल्ली 2004 से 2007 के बीच पंजाब के अतिरिक्त महाधिवक्ता रहे थे और 2007 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया था। उच्चतम न्यायालय में उनका कार्यकाल तीन वर्ष से कुछ अधिक का होगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना वर्ष 2018 में न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के बाद सीधे उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बनने वाली केवल दूसरी महिला वकील हैं। 27 जून 1966 को जन्मी वी. मोहना कोयंबटूर की रहने वाली हैं। उन्होंने 1988 में कोयंबटूर लॉ कॉलेज से स्नातक किया और वह वर्तमान उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की सहपाठी रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि न्यायमूर्ति विश्वनाथन और वी. मोहना दोनों ने भारत के पूर्व महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) के. के. वेणुगोपाल के कार्यालय में काम किया है। लगभग पांच साल के कार्यकाल के साथ न्यायमूर्ति मोहना जून 2031 में सेवानिवृत्त होंगी।

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