
नयी दिल्ली, 02 जून । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में मंगलवार को अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के परिसरों पर छापेमारी की।
यह छापेमारी वेदांता द्वारा अपनी मुख्य कंपनी ‘वेदांता रिसोर्सेज’ को किए गए रॉयल्टी भुगतान की जांच के सिलसिले में समूह के मुंबई और दिल्ली स्थित कार्यालयों की जा रही है।
इस मामले पर वेदांता के प्रवक्ता ने कहा कि हम अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और मांगी गई सभी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। कंपनी सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। चूंकि यह मामला अभी नियामक प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए हम इस स्तर पर आगे कोई टिप्पणी करने में असमर्थ हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब कंपनी अपने कारोबार को चार नयी सूचीबद्ध कंपनियों में बांटने (डी मर्जर) की प्रक्रिया में जुटी है। कंपनी को इस बंटवारे की प्रक्रिया के लिए विभिन्न विनियामक मंजूरियां भी मिल चुकी हैं।
प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी की रिपोर्टों के बाद वेदांता के शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखा गया और वे घाटे में चले गए। बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) में कंपनी के शेयर की कीमत गिरकर दिन के निचले स्तर 328.30 रुपये पर आ गई।
वेदांता हाल के दिनों में भी विवादों में रही है। अप्रैल 2026 में छत्तीसगढ़ के एक बिजली संयंत्र में बॉयलर फटने से 20 से अधिक श्रमिकों की जान चली गई थी, जिसके बाद अनिल अग्रवाल सहित शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके अलावा एक अन्य विवाद 400 करोड़ रुपये से अधिक के चुनावी बांड खरीदने से जुड़ा है।
वेदांता लिमिटेड इस समूह की भारत में सूचीबद्ध कंपनी है जिसका बाजार पूंजीकरण 1.3 लाख करोड़ रुपये है, जबकि ब्रिटेन स्थित कंपनी ‘वेदांता रिसोर्सेज’ इसकी मुख्य कंपनी है।