
लखनऊ, 4 जून। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और ज्ञान-विरासत का प्रतिनिधि प्रदेश है। इसलिए पर्यटन विकास को केवल आधारभूत ढांचे तक सीमित न रखकर उसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और वैश्विक पहचान से जोड़कर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
गुरुवार को पर्यटन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन प्रदेश की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को नई गति देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इससे स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, पारंपरिक कला, खानपान और सेवा क्षेत्र को व्यापक अवसर मिलेंगे।बैठक में भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण से जुड़े ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन पांडुलिपियां भारत की सभ्यता, दर्शन और वैज्ञानिक परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण और डिजिटलीकरण से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सकेगी।अधिकारियों ने बताया कि अब तक 13.70 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण और संरक्षण किया जा चुका है। पर्यटन नीति-2022 में प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने निवेश और अनुभव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
बैठक में नीम करोली बाबा सर्किट और बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट विकसित करने के साथ-साथ ‘परंपरा’ विरासत अनुभव केंद्र, कृषि पर्यटन और वाइनयार्ड पर्यटन जैसी नई अवधारणाओं को प्रोत्साहित करने पर विचार किया गया।
मुख्यमंत्री ने लखनऊ में नव-लोकार्पित नौसेना शौर्य वाटिका और निर्माणाधीन आईएनएस गोमती शौर्य संग्रहालय की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजनाएं युवाओं में राष्ट्रभक्ति और सैन्य गौरव की भावना को मजबूत करेंगी। वहीं आगरा में निर्माणाधीन छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय में उनके जीवन, स्वराज्य स्थापना, आगरा प्रवास और सुशासन की अवधारणा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।नैमिषारण्य के विकास की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे वैदिक ज्ञान, योग, आयुर्वेद और वेलनेस का वैश्विक केंद्र बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि यहां धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। मास्टर प्लान के तहत वेद विज्ञान केंद्र, वैदिक थीम पार्क, रिवरफ्रंट, तीर्थयात्री आवास और इंटरप्रिटेशन सेंटर विकसित किए जाएंगे।
मिर्जापुर-विंध्याचल क्षेत्र के लिए तैयार हो रहे मास्टर प्लान की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने त्रिकोण परिक्रमा क्षेत्र के समग्र विकास पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि शक्तिपीठों के निकट माता सती की पौराणिक कथा का आकर्षक और प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया जाए। बैठक में चित्रकूट स्थित प्राचीन सोमनाथ मंदिर के संरक्षण कार्यों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में उनके मूल स्वरूप और ऐतिहासिक प्रामाणिकता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।