
लखनऊ, 5 जून । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया और वन्यजीव तस्करों के प्रति सजग रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को रोकना सजग नागरिकों का दायित्व है।मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को पांच संकल्प भी दिलाए—‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाना, पेड़ों को शरारती तत्वों और जीव-जंतुओं से बचाना, जल संरक्षण, सिंगल यूज प्लास्टिक का त्याग और प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाना। मुख्यमंत्री शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ विषय पर आयोजित राज्यस्तरीय संगोष्ठी का शुभारंभ कर रहे थे।
उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, बच्चों को चॉकलेट वितरित कीं, आमजन को कपड़े के झोले देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और स्कूली बच्चों के साथ सेल्फी लेते हुए वृक्ष कलश में जल अर्पित किया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जल और वन जीवन चक्र के अभिन्न अंग हैं, लेकिन विकास के नाम पर हमने पर्यावरण की सर्वाधिक उपेक्षा की है। 40 वर्ष से अधिक आयु के लोग सहज ही महसूस कर सकते हैं कि पर्यावरण से खिलवाड़ की कीमत आज दुनिया चुका रही है। 25 वर्ष पहले की तुलना में मौसम चक्र में डेढ़ महीने का अंतर आ चुका है।योगी ने कहा कि कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले उत्तर प्रदेश में इसका सीधा असर किसान पर पड़ेगा—अतिवृष्टि, अनावृष्टि, आय में कमी और खाद्यान्न संकट जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। असमय आने वाली आपदाएं चेतावनी हैं कि अब भी समय रहते सुधार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने भगवान राम के उद्घोष ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि मां और मातृभूमि के प्रति कर्तव्य और कृतज्ञता हर भारतीय का धर्म है। उन्होंने भारतीय परंपरा में प्रकृति और जीव-जंतुओं के सह-अस्तित्व को रेखांकित किया—भगवान शिव के गले में सर्प, कार्तिकेय की सवारी मोर, गणपति का मूषक, मां भगवती की सवारी शेर और गोमाता का कृषि में स्थान। सर्प को किसान मित्र मानने की परंपरा भी इसी जीवन चक्र की कड़ी है।मुख्यमंत्री ने लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां का तापमान शहर से 4-5 डिग्री सेल्सियस कम रहता है। अवैध कब्जे हटाकर कुकरैल के किनारे ‘सौमित्र वन’ विकसित किया गया है, जो अब राजधानी का सबसे आकर्षक प्राकृतिक स्थल बन रहा है।गोरखपुर में रामगढ़ताल और चिलुआताल के संरक्षण का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि इन प्राकृतिक जलस्रोतों को बचाने से न केवल जैव विविधता सुरक्षित हुई, बल्कि फर्टिलाइजर कारखाना, टाउनशिप, सैनिक स्कूल और एसएसबी मुख्यालय को भी उसी ताल से जलापूर्ति हो रही है। उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले गोरखपुर का तापमान 45 डिग्री था, लेकिन चिलुआताल के पास 35 डिग्री से कम महसूस हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 वर्ष पहले प्रदेश में केवल एक रामसर साइट थी, आज उनकी संख्या बढ़कर 13 हो गई है। बलिया की सुरहा ताल को 13वीं रामसर साइट के रूप में अधिसूचित किया गया है। उन्होंने ग्राम प्रधानों, नगर निकायों के अध्यक्षों और महापौरों से अपील की कि तालाब, पोखर, कुएं और बावड़ी को संरक्षित व पुनर्जीवित कर उन्हें पंचायत और निकाय का हिस्सा बनाया जाए। नदियों के कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण न हो, इसके लिए अमृत सरोवर योजना को भी गंभीरता से लागू किया जाए।योगी ने बताया कि मार्च 2017 में वन विभाग की नर्सरी में मुश्किल से 5 लाख पौधे उपलब्ध थे, लेकिन आज सरकारी और निजी नर्सरियों में 55 करोड़ पौधे तैयार हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रदेशभर में 5 करोड़ पौधे लगाए जा रहे हैं। जुलाई में एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का महाभियान चलाया जाएगा। पिछले 9 वर्षों में प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सर्वाधिक एक्सप्रेसवे, फोरलेन-सिक्सलेन मार्ग और औद्योगिक अवसंरचना विकसित होने के बावजूद वन आच्छादन बढ़ाने में सफलता मिली है। योगी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण, जैव विविधता का क्षरण और जल संकट को उन्होंने सबसे बड़ी चुनौती बताया। स्वच्छ वायु, निर्मल जल, उपजाऊ भूमि और हरे वन मानव सभ्यता की जीवन रेखा हैं—जब प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानवता सुरक्षित रहेगी।